
पालघर की घटना को लेकर यूपी के साधू-संतों में आक्रोश, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की कर रहे मांग
लखनऊ. महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर दो साधुओं को जान से मारे जाने की घटना को लेकर देशभर के संत समाज में गुस्सा है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, जूना अखाड़ा के साथ ही सभी साधू संतों ने इस घटना की निंदा की है। दोनों साधू वाराणसी में मौजूद जूना अखाड़े से सम्बंधित थे। जिसके चलते यहां के साधुओं में खासा रोष है। लॉकडाउन के चलते यहां साधु-संत सड़कों पर तो नहीं उतरे, लेकिन सभी एक दूसरे से ऑनलाइन जुड़कर आगे की रणनीति बना रहे हैं। घटना के बाद देश के सभी बड़े संतों ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से मामले में कड़े कदम उठाने की मांग की है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस हत्याकांड की सीबीआई जांच कराकर दोषियों को मृत्युदंड देने की बात कही है। तो अखाड़ा परिषद के नरेंद्र गिरि ने महाराष्ट्र में रावण राज बताया और जिम्मेदार लोगों को फांसी नहीं होने पर लॉकडाउन के बाद महाराष्ट्र कूच करने का ऐलान किया है। वहीं अयोध्या के संतों ने कहा कि यदि महाराष्ट्र सरकार दोषियों को जल्द सजा नहीं दे पाती संत आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इसके अलावा प्रसिद्ध भागवत प्रवक्ता देवकीनंदन ठाकुर ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।
रामभद्राचार्य ने की सीबीआई जांच की मांग
देश के बड़े संतों विद्वानों में गिने जाने वाले जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने केंद्र व महाराष्ट्र सरकार से इस हत्याकांड की सीबीआई जांच कराकर दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की है। रामभद्राचार्य ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी करते हुए कहा कि केंद्र व महाराष्ट्र सरकार इस हत्याकांड की सीबीआई जांच कराकर दोषियों को मृत्युदंड दे। नहीं तो 3 मई के बाद लाखों की संख्या में साधू संत महाराष्ट्र की ओर कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस निर्दयता से संतों की हत्या की गई है उससे देश के सभी संतों में आक्रोश है। हम चुप नहीं बैठेंगे। महाराष्ट्र सरकार को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।
नरेंद्र गिरी ने कहा- सभी को मिले फांसी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् ने भी इस घटना पर गुस्सा जाहिर किया है। साथ ही अखाड़ा परिषद ने कहा है कि महाराष्ट्र में रावण राज चल रहा है और अगर जिम्मेदार लोगों को अगर फांसी नहीं होती है तो लॉकडाउन के बाद नागा साधुओं की फौज महाराष्ट्र कूच करेगी। साधुओं की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्य्क्ष नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा है कि दो संतों के साथ जो हुआ वो बेहद दर्दनाक है। साधुओं की मौत पर मुझे आश्चर्य है कि यह मनुष्य नहीं कर सकता, राक्षस लोग ही ऐसा कर सकते हैं। इसलिए इन्हें फांसी होनी चाहिये।
अयोध्या के संत भी नाराज
हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास ने अपने ही कमरे में अनशन का ऐलान कर दिया। तपस्वी छावनी के उत्तराधिकारी महंत परमहंस दास ने कहा अगर 23 अप्रैल तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो 25 अप्रैल से वह आमरण अनशन करेंगे। उधर श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के लचर रवैए से बाला साहेब की आत्मा भी कराह रही होगी। श्रीराम वल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि महाराष्ट्र सरकार यदि दोषियों को अति शीघ्र सजा नहीं दे पाती संत आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
जल्द हो सजा- देवकीनंदन
देवकीनंदन महाराज ने अपने बयान में कहा कि भारत बहुत सहनशील देश है, लेकिन जब निर्दोष और निहत्थे लोगों की निर्मम हत्याएं होती हैं तो मन बहुत दुखता है। इसकी जितनी भत्र्सना की जाए वह कम है। उन्होंने कहा महाराष्ट्र सरकार को भीड़ में शामिल सभी लोगों को जल्द से जल्द पकड़कर कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए। इसमें शामिल हत्यारों पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे आगे कोई भी ऐसी उन्मादी भीड़ का हिस्सा बनकर किसी निर्दोष पर हमला करने से पहले कई बार सोचे।
लॉकडाउन के बाद घेराव की चेतावनी
दोनों साधू वाराणसी में मौजूद जूना अखाड़े से सम्बंधित थे। जिसके चलते यहां के साधुओं में खासा रोष है। काशी के सभी मठों व अखाड़ों के संतों ने ऑनलाइन बैठक कर इस घटना की निंदा की और लॉकडाउन खत्म होने के बाद हादसे में मृत साधुओं के इंसाफ के लिए आंदोलन करने का निर्णय लिया। काशी के संतों का कहना है कि माहाराष्ट्र में साधुओं के साथ हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद पूरा संत समाज अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में महाराष्ट्र में आंदोलन और सरकार का घेराव करेगा।
Published on:
22 Apr 2020 09:13 am
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