
लखनऊ. भारत में तीन तलाक के बाद अब हलाला को खत्म करने की मांग उठने लगी है। भारत सरकार जहां मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक को खत्म करने की कोशिश में जुटी हुई है। वहीं शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने निकाह हलाला के मौजूदा तौर-तरीकों की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा जिम्मेदारी न निभाने के कारण सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। अब शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी द्वारा मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाली हलाला प्रथा के खिलाफ सवाल उठाते हुए इसे खत्म करने की मांग की गई है।
हलाला को खत्म करने की उठने लगी मांग
भारत में तीन तलाक के बाद अब हलाला को खत्म करने की मांग उठने लगी है। शिया वक्फ बोर्ड ने इस व्यवस्था को समाप्त करने की वकालत की है। वकालत में कहा गया है कि निकाह हलाला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका AIMPLB द्वारा अपनी जिम्मेदारी न निभाने का नतीजा सामने दिखाई दे रहा है। रिजवी ने कहा कि हलाला प्रथा कुरान मजीद में इसलिए लिखी गई कि लोग जल्दी तलाक न दें, लेकिन हलाला प्रथा का इस्तेमाल महिलाओं के शारीरिक शोषण के लिए किया जाता है।
अत्याचार का संज्ञान में लेना चाहिए
रिजवी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को इस्लाम की आड़ में मुस्लिम महिलाओं पर हो रहे अत्याचार का संज्ञान में लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि हलाला का मतलब है अगर कोई भी मुस्लिम व्यक्ति अपनी पत्नी को तीसरी बार जायज तरीके से तलाक दे देता है तो वह तलाकशुदा पत्नी उस व्यक्ति पर हो जाती है। अब वह उससे दोबारा निकाह तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उस महिला का किसी और से निकाह और फिर उससे तलाक न हो जाए। रिजवी ने हलाला के मौजूदा तौर-तरीकों की कड़ी आलोचना की है।
शारीरिक शोषण करने के लिए देत हैं तलाक
शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा है कि हलाला का मतलब यह नहीं है कि कुरान और इस्लाम के मुताबिक हलाला उस महिला के साथ किया जाना चाहिए जिसे इस्लाम के हिसाब से तीन बार तलाक देकर अलग कर दिया गया हो और उससे फिर निकाह की मंशा ना हो, लेकिन लोग महज शारीरिक शोषण करने के लिए तलाक देते हैं और फिर हलाला में दूसरे के साथ निकाह करवा कर कुछ दिन बाद तलाक करवा खुद निकाह कर लेते हैं जो कि सरासर गलत है। इस्लाम के मुताबिक जिससे तलाक की नीयत के साथ निकाह किया जाए वो निकाह ही गलत है। ऐसे में जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वो इस्लाम की अपनी सहूलियत के हिसाब से इस्तेमाल करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी याचिका
बता दें कि 5 मार्च को निकाह हलाला और बहु विवाह को असंवैधानिक घोषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) अप्लिकेशन एक्ट, 1937 की धारा-2 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। याचिका के मुताबिक, इससे बहु विवाह और निकाह हलाला को मान्यता मिलती है। याची ने निकाह हलाला और बहुविवाह को संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार), 15 (लैंगिक आधार पर भेदभाव की मनाही) और अनुच्छेद-21 (जीवन के अधिकार) का उल्लंघन बताया है।
सीरिया जैसे हालात पैदा होने की बात कही गई
इससे पहले अयोध्या मसले पर भी आपसी समाधान न होने की सूरत में ऑर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख श्री श्री रविशंकर ने भारत में सीरिया जैसे हालात पैदा होने की बात कही थी। जिस पर सैयद वसीम रिजवी ने जवाब दिया था कि भारत में सीरिया जैसी स्थिति पैदा नहीं हो सकती है क्योंकि यहां के हिंदू और मुसलमान दोनों ही धर्म निरपेक्ष हैं। सीरिया जैसी स्थिति यहां पैदा नहीं हो सकती है। यहां हिंदू और मुसलमानों के बीच थोड़ी दरारें हैं लेकिन अगर इन मामलों में जल्द सुधार नहीं आया तो ये इन दरारों में खाई भी बनने की सम्भावना हो सकती हैं।
Published on:
07 Mar 2018 12:11 pm

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