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सिंगल विंडों से निवेशकों की राह सुगम, यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए आयाम

- यूपी में निवेश का माहौल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम पर जोर - निवेशकों को भा रहा सिंगल विंडो सिस्टम - निवेश से खुलेंगे रोजगार के नए आयाम - रियल एस्टेट सेक्टर में आएंगे बदलाव

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सिंगल विंडों से निवेशकों की राह सुगम, यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए आयाम

सिंगल विंडों से निवेशकों की राह सुगम, यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए आयाम

लखनऊ. कोरोना काल में चरमराई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तमाम प्रयास कर रही है। यूपी में निवेश का माहौल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम पर जोर दिया जा रहा है। सरकार नए उद्दोग के जरिये रोजगार पैदा करेगी। ये इसी का नतीजा है कि कोरोना के दौरान भले ही पूरे देश के निवेश पर असर पड़ा हो लेकिन योगी सरकार इस दौरान 45,000 करोड़ का निवेश लाने में सफल रही है। जल्द ही ये कंपनियां निवेश की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगी। इसी के साथ यूपी में सिंगल विंडो सिस्टम के तहत नई फैक्ट्री लगाए जाने की भी योजना है।

1.35 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास कमिश्नर आलोक टंडन के मुताबिक यूपी में 10 देशों की कंपनियों के निवेश के प्रस्ताव हैं। राज्य सरकार द्वारा भारत के सबसे बड़े डिजिटल सिंगल विंडो पोर्टल 'निवेश मित्र' के जरिये उद्यमियों को लगभग 166 सेवाएं दी जा रही हैं। इससे रोजगार के नए आयाम खुलेंगे। सिंगल विंडो सिस्टम में शामिल इन प्रोजेक्ट्स के जरिए लगभग 1,35,362 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

क्या है सिंगल विंडो सिस्टम

सिंगल विंडो सिस्टम निवेशकों की राह आसान करने के लिहाज से बनाया गया है। दरअसल, किसी नए प्रोजेक्ट को लॉन्च करने से पहले डेवलपर्स को तकरीबन 50 डिपार्टमेंट से अप्रूवल लेना होता है। इसमें काफी वक्त बर्बाद होता है। सिंगल विंडो सिस्टम लागू होने से प्रोजेक्ट अप्रूवल एक ही जगह से किया जा सकेगा और डेवलपर्स को एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट नहीं दौडना होगा। इसका अर्थ इसके नाम से ही है यानी कि 'सिंगल विंडो' से ही सारे काम हो जाएंगे।

रियल एस्टेट सेक्टर में आएंगे बदलाव

रियल एस्टेट कंपनियों को एनवायरमेंट क्लियरेंस लेने में ज्यादा समय समय लगता है। प्रोजेक्ट अप्रूवल में देर होने से प्रोजेक्ट की कॉस्ट बढ़ जाती है जिस कारण प्रॉप्रटी की कीमतें भी कई गुना बढ़ जाती हैं। सिंगल विंडो सिस्टम लागू होने से प्रोजेक्ट पास होने से इस समस्या से राहत मिलेगी। जहां पहले चार से पांच या उससे ज्यादा महीनों का समय लगता था, वह काम सिंगल विंडो सिस्टम से 45 से 60 दिनों में पूरा हो सकेगा।

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