इन तमाम उंच-नीच के बीच चुनाव से कुछ माह पूर्व सैफई के यादव कुल में सत्ता को लेकर जो संघर्ष शुरू हुआ है, उसने पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है। यदुबंश एकता को जो भी दावा करे परन्तु इस घटना ने सपा के राजनीतिक भविष्य की पटकथा लिख दी है। यह संघर्ष और बढ़ने के ही आसार है। चुनाव बाद ही इसका पटाक्षेप होने की संभावना है। ऐसे में सपा के पास भी यादव समर्थकों के अलावा मुस्लिमों के ही साथ का विश्वास है। नौकरियों में यादवों को जिस प्रकार तरजीह दी गई है तथा अन्य वर्गो के योग्य छात्रों की उपेक्षा की गई है, उसका सपा सरकार के खिलाफ प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। अखिलेश सरकार ने चुनाव से पहले किसानों को स्मार्ट फोन देने का भी वादा किया है परन्तु बेरोजगारी भत्ता तथा लैपटाप से बंचित युवा किसान इस वादे पर कितना विश्वास करेगा, यह समय बताएगा।