
Sahir Ludhianvi
रुचि शर्मा
लखनऊ. मैं पल दो पल का शायर हूं…पल दो पल मेरी जवानी है …यह गाना सुनते ही आपके दिलों में प्यार का दरवाजा खटखटा जाता है। मुहब्बत, प्यार, इश्क की बात हो अौर साहिर लुधवानी का नाम न हो तो बेकार है एेसी मुहब्बत करना।
इश्क अमर होता है। वो सरहदों, जातियों, मजहब या वक्त के दायरे में नहीं बांधा जा सकता। एेसा मानते थे साहिर। लोग कहते हैं कि जितने तरह के लोग, उतने तरह की मोहब्बत। साहिर और अमृता का प्यार भी जमाने से अलहदा थ। इश्क की पहले से खिंची लकीरों से जुदा। अधूरी मोहब्बत का ये वो मुकम्मल अफसाना था, जिसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती। आज साहिर का जन्मदिन है। इस खास मौके में साहित्यकार डॉ. निर्मल दर्शन साहिर से जुड़ी कुछ खास बात बता रहे हैं।
अजीब तरह के शायर थे साहिर
वे बताते हैं कि साहिर लुधवानी उर्दू शायर में एक अजीब तरह के शायर रहे। अजीब इसलिए इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि साहिर मुशायरों में भी काफी जानामाना नाम रह है। दर्शन बताते हैं कि जैसे उन्होंने फिल्मों में लिखा है वैसा कोई नहीं लिख सका। मेरे नजर में साहिर की सबसे बड़ी बात यह है कि वे एेसे शायर थे जो साहित्य के साथ- साथ फिल्मों में भी उतने ही मशहूर थे। दर्शन बताते हैं कि साहिर का लखनऊ से अच्छा रिश्ता रहा वे कई बार मुशायरा करने लखनऊ आए थे। जानिसार अख्तर अौर मजाज लखनवी इनका एक ग्रुप था साहिर अक्सर उनके साथ अॉल इंडिया उर्दू कॉन्फ्रेंस में लखनऊ आया जाया करते थे।
रुमानी शायर रहे
डॉ. निर्मल दर्शन बताते हैं कि साहिर बुनियादी तौर पे एक रुमानी शायर थे, जिनका इश्क कभी परवान न चढ़ सका। यही वजह थी कि उनकी शायरी दर्द-ए-इश्क के अहसास से अछूती नहीं। साहिर की शायरी में इश्क के हर रंग का अहसास शामिल हैं, जो दिल को गहराई तक छू जाता है। उनकी अधूरी इश्क का वाकिए का जिक्र उनकी नज्म में मिलता है।
Published on:
08 Mar 2018 05:58 pm

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