
Subrata Roy Sahara Death: सहारा परिवार के प्रमुख सुब्रत रॉय के निधन से उन लोगों को तगड़ा झटका लगा है। जिन्होंने सहारा ग्रुप की कंपनियों में अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा लगाया था। हालांकि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कुछ लोगों को उनका पैसा वापस मिल गया, लेकिन तमाम लोगों का पैसा सहारा की कंपनियों में अभी भी अटका है। इस मामले में सहारा प्रमुख के खिलाफ कई प्रदेशों में मुकदमे भी दर्ज हैं। इसी के तहत पिछले साल यानी साल 2022 में मध्य प्रदेश की दतिया पुलिस ने भी सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय और उनकी कंपनी के निदेशक मंडल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराए थे। मध्य प्रदेश की दतिया पुलिस को सहारा प्रमुख के खिलाफ 14 शिकायतें मिली थीं।
सहारा इंडिया की शुरूआत साल 1978 में हुई थी। यह कंपनी सुब्रत रॉय सहारा ने शुरू की थी। सुब्रत रॉय सहारा का जन्म 10 जून 1948 को बिहार में हुआ था। हालांकि बाद में वे यूपी की राजधानी लखनऊ में बस गए। यहीं उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत की। वह सहारा इंडिया के संस्थापक थे। इसके बाद सुब्रत रॉय दिन दूना रात चौगुना तरक्की करने लगे। उन्होंने सहारा इंडिया के अंदर ही कई अन्य कंपनियां भी खोली। इनमें रियल एस्टेट, हाउसिंग इन्वेस्टमेंट, जीवन बीमा के अलावा अन्य कंपनियां शामिल रहीं। हालांकि समय बीतने के साथ ही सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय का विवादों से भी सामना हुआ। लोगों ने इनकी कंपनियों पर उनका पैसा हड़पने का आरोप लगाया और इसको लेकर कई मुकदमे दर्ज कराए गए।
सहारा ग्रुप की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SIRECL)और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SHICL)पर घोटाले का आरोप लगा। बात 30 सितंबर, 2009 की है। सहारा ग्रुप की एक कंपनी सहारा प्राइम सिटी ने अपने आईपीओ के लिए सेबी में आवेदन दाखिल किया था। डीआरएचपी में कंपनी से जुड़ी सारी अहम जानकारी होती है। जब सेबी ने इस डीआरएचपी का अध्ययन किया तो सेबी को सहारा ग्रुप की दो कंपनियों की पैसा जुटाने की प्रक्रिया में कुछ गलतियां दिखीं। ये दो कंपनियां सहारा इंडिया रियल एस्टेट कार्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड थीं।
25 दिसंबर 2009 और 4 जनवरी 2010 को सेबी को दो शिकायतें मिलीं। इनमें कहा गया कि सहारा की कंपनियां वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर जारी कर रही हैं। साथ ही गलत तरीके से धन जुटा रही हैं। इन शिकायतों से सेबी की शंका सही साबित हुई। इसके बाद सेबी ने इन दोनों कंपनियों की जांच शुरू कर दी। सेबी ने पाया कि SIRECL और SHICL ने ओएफसीडी के जरिए दो से ढाई करोड़ निवेशकों से करीब 24,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। सेबी ने सहारा की इन दोनों कंपनियों को पैसा जुटाना बंद करने का आदेश दिया और कहा कि वह निवेशकों को 15 फीसदी ब्याज के साथ उनका पैसा लौटाए। इसके बाद यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट गया। हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप से फंड के सोर्स पूछे तो सहारा इंडिया परिवार सुप्रीम कोर्ट में तथ्य नहीं दे पाया।
अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों कंपनियों को सेबी के साथ निवेशकों का पैसा तीन महीने के अंदर 15 फीसद ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया। साथ ही सेबी को सभी ओएफसीडी धारकों की डिटेल प्रदान करने को भी कहा गया। इसके बाद सहारा 127 ट्रक लेकर सेबी के ऑफिस पहुंचा, जिसमें निवेशकों की डिटेल्स थीं। लेकिन इन फाइल्स में निवेशकों की पूरी जानकारी नहीं थी। इससे मनी लॉन्ड्रिंग का शक बना रहा। सहारा सेबी को तीन महीने में 15 फीसद ब्याज के साथ पैसा जमा कराने में नाकाम रहा।
Updated on:
15 Nov 2023 12:50 am
Published on:
15 Nov 2023 12:49 am
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