
मां-बाप के सामने हुआ गैंगरेप का बदला लेने के लिए 22 ठाकुरों की कर दी थी हत्या, ऐसी थी फूलन देवी कहानी
लखनऊ. बीहड़ (bihad) की दहशत फूलन देवी के नाम भर से चंबल के बड़े-बड़े डाकू कांपते थे। चंबल (chambal) के साथ ही कानपुर देहात के लोग आज भी फूलन देवी का नाम सुनते ही डर जाते हैं। फूलन इतनी खुंखार थी कि जब वह अपने शिकार को हलाल करती तो तड़पा तड़पा कर मारती थी। फूलन देवी (Phoolan Devi) का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जलाऊ जिले के पुरवा गांव (pura gaon) में हुआ था। फूलन एक मल्लाह परिवार से ताल्लुक रखती थीं, जिसके चलते ऊंची जाति के लोग उन्हें और उनके परिवार को घृणा की दृष्टि से देखते थे।
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15 साल की उम्र में मां-बाप के सामने हुआ गैंगरेप
दस्यू सुंदरी और बैंडिट क्वीन(Bandit Queen) के नाम से जानी जाने वाली फूलन देवी जब मात्र 11 साल की थीं, तभी फूलन के चचेरे भाई ने उनकी शादी पुट्टी लाल नाम के एक बूढ़े आदमी से करवा दी। फूलन अपने पति से उम्र में काफी छोटी थी, जिसके चलते फूलन का पति उन्हें प्रताड़ित करने लगा और आए दिन उनका रेप करता। ऐसे में अपने पति से तंग आकर फूलन ने अपने पति का घर छोड़ दिया और अपने माता पिता के साथ आकर रहने लगीं। फूलन जब 15 साल की थीं, तब गांव के ठाकुरों ने उनके माता-पिता के सामने उनका गैंगरेप किया, जिसके बाद फूलन देवी ने हर जगह न्याय की गुहार लगाई, लेकिन उनके हाथ निराशा के अलावा कुछ नहीं लगा। ऐसे में नाराज दबंगों ने एक दस्यु गैंग से कहकर फूलन का अपहरण करवा लिया। इस दौरान डकैतों ने लगातार 3 हफ्तों तक फूलन देवी का रेप किया। जानकारों की मानें तो हालातों ने फूलन देवी को बहुत कठोर बना दिया था।
रेप का बदला 22 ठाकुरों की हत्या से लिया
अपने ऊपर हुए सितम के चलते फूलन देवी ने अपना एक अलग गैंग बनाया और 14 फरवरी 1981 को बहमई में फूलन ने एक लाइन में खड़ा करके 22 ठाकुरों की हत्या कर दी। इस घटना पर फूलन देवी का कहना था कि ठाकुरों ने उनके साथ रेप किया और उन्होंने इसी का बदला उनसे लिया है। उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। 1983 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए कहा, साथ ही मृत्युदंड न देने का भी भरोसा दिलाया। जिसके बाद फूलन देवी ने मध्य प्रदेश में 10 हजार जनता और 300 पुलिसकर्मियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
मिर्जापुर से बनी थी सासंद
1996 में फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत गईं. मिर्जापुर से सांसद बनीं। 1998 में हार गईं, पर फिर 1999 में वहीं से जीत गईं। 25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा फूलन से मिलने आया। इच्छा जाहिर की कि फूलन के संगठन ‘एकलव्य सेना’ से जुड़ेगा। खीर खाई और फिर घर के गेट पर फूलन को गोली मार दी। कहा कि मैंने बेहमई हत्याकांड का बदला लिया है. 14 अगस्त 2014 को दिल्ली की एक अदालत ने शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
Published on:
25 Jul 2019 05:07 pm
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