
उपचुनाव में आए चौकाने वाले तथ्य सामने, सभी को करना चाहिए इस पर गौर, बसपा ने न किया होता ऐसा तो रहती फायदे में
लखनऊ. उपचुनाव में जिस तरह के नतीजे सामने आए हैं, उसने सभी को हैरानी में डाल दिया है। पहली बार उपचुनाव के मैदान में उतरी बसपा का जो हश्र हुआ है उसकी मायावती ने कल्पना भी नहीं की होगी। वहीं भाजपा ने अपनी एक सीट गवाई, हालांकि अपना दल के गठबंधन के साथ पार्टी ने 8 सीटों पर कब्जा भी किया। इसमें कोई दो राय नहीं कि सपा को इस चुनाव में फायदा हुआ है। अपने कब्जे वाली एक सीट रामपुर के साथ सपा ने बसपा और भाजपा की एक सीट भी छीन ली, जिससे पार्टी का आत्म विश्वास बढ़ा है। कांग्रेस ने एक भी सीट नहीं जीती लेकिन पार्टी का मत प्रतिशत बढ़ा है, एक-दो सीटों पर बसपा-सपा को भी पछाड़ा है, जो 2022 चुनाव के लिहास से प्रियंका गांधी-अजय कुमार लल्लू एंड टीम के लिए अच्छी खबर हैं। इसी के साथ ही 5 ऐसे चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनपर पार्टी को गौर करना चाहिए।
1. कांग्रेस का बढ़ा मत प्रतिशत-
कांग्रेस को उपचुनाव में कुल 11.5 प्रतिशत वोट मिले हैं। इस हिसाब से कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। लेकिन कुछ सीटों पर उसका वोट प्रतिशत बढ़ा भी है। गोविंदनगर सीट पर कांग्रेस के लिए 12 फीसद मत बड़ा है। यहां पार्टी को कुल 32.43 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं गंगोह सीट पर कांग्रेस को 28 फीसदी वोट मिले, जो 2017 विधानसभा चुनाव की तुलना में 4.05 प्रतिशत ज्यादा है। 2017 में इस सीट पर कांग्रेस को 23.95 फीसदी मत हासित हुए थे। वहीं कई सीटों पर कांग्रेस ने बसपा को पछाड़ा भी। कांग्रेस सहारनपुर की गंगोह, कानपुर की गोविंद नगर सीट पर दूसरे पायदान पर रही। वहीं रामपुर, जैदपुर, लखनऊ कैंट, गोविंदनगर व प्रतापगढ़ में कांग्रेस ने बसपा को पीछे भी छोड़ दिया।
2. सपा चार सीटों पर रही नंबर दो पर-
तीन सीटें जीतकर विपक्षी दलों में सबसे आगे निकली सपा चार सीटों पर नंबर दो पर भी रही। समाजवादी पार्टी लखनऊ की कैंट, बहराइच की बलहा, चित्रकूट की मानिकपुर, प्रतापगढ़ सीट पर मतों के हिसाब से दूसरे स्थान पर रही। इस उपचुनाव में कुल 22.61 फीसदी वोट के साथ भी सपा दूसरे पायदान पर रही।
3. बसपा के हाथ से फिसली एकमात्र सीट-
उपचुनाव में बसपा अपनी गढ़ वाली सीट तक नहीं बचा पाई। अम्बेडकरनगर की जलालपुर सीट पर बसपा का कब्जा था, लेकिन रितेश पांडेय के सांसद बनने के बाद खाली हुई इस सीट पर हुए उपचुनाव में बेहद रोमांचक मुकाबला हुआ और बसपा को यह सीट हाथ से धोनी पड़ी। बताया जा रहा है कि मुस्लिमों ने मायावती का साथ नहीं दिया। और सपा प्रत्याशी अंत में विजय रहे। बसपा को इस उपचुनाव में कुल 17 फीसदी वोट मिले।
4. गठबंधन टूटने से बसपा को नुकसान-
इस हार से बसपा का यह भ्रम टूट गया कि सपा से गठबंधन कर उसे नुकसान हो रहा है। मायावती ने वोट ट्रांसफर न होने के चलते सपा से गठबंधन तोड़ दिया था। लेकिन अकेले लड़ने से बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई। वहीं सपा को दो सीटों का फायदा हो गया। इसमें सपा ने बसपा की ही कब्जे वाली जलालपुर सीट भी छीन ली।
4. भाजपा को दो सीटों पर संघर्ष करना पड़ गया-
भारतीय जनता पार्टी को घोसी और गंगोह सीट पर संघर्ष करना पड़ा। सहारनपुर की गंगोह सीट पर तो कांग्रेस के नोमान मसूद शुरुआत से आगे चर रहे थे। लगा कि कांग्रेस इस बार भाजपा का पटखनी दे ही देगी, लेकिन आखिर के राउंड्स में भाजपा को बढ़त मिलनी शुरू हो गई और भाजपा प्रत्याशी किरत सिंह ने 68300 के साथ कांग्रेस उम्मीदवार (62881) को हरा दिया। वहीं मऊ की घोसी सीट पर बेहद रोमांचक मामला रहा। निर्दलीय प्रत्याशी सुधाकर सिंह ने भाजपा को मुश्किल में ला खड़ा किया, लेकिन अंत में भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार राजभर ने 1773 मतों से जीत हासिल कर ली।
Published on:
25 Oct 2019 08:02 pm
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