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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के गांवों में जल्द ही बैंकिंग सखी घर-घर दस्तक देंगी। बैंकिंग संबंधी हर समस्या क समाधान और सुविधाएं दरवाजे पर ही उपलब्ध कराएंगी। सरकारी अनुदान हो या पेंशन या फिर जनधन खातों से संबंधी समस्याएं, सभी का समाधान बैंकिंग सखी चुटिकयों में कर देंगी। यूपी की योगी सरकार सूबे में 58 हजार बैंक सखी की भर्ती कर रही है। एक मोबाइल ऐप के जरिये इन सबका इंटरव्यू लिया जाएगा, जिसके बाद इनकी तैनाती का रास्ता साफ होगा। बैंक सखी के लिये 2 लाख 17 हजार आवेदन आए हैं।
चार हजार रुपये मिलेगा मानदेय
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसी साल बीते मई के महीने में 58 हजार बैंकिंग करेस्पाँडेंस रखे जाने का ऐलान किया था। इन्हें 'बैंकिंग सखी’ का नाम दिया गया था। महिलाओं के लिये शुरू की गई इस योजना के जरिये सरकार का मकसद बैंकिंग सुविधाओं की आसान उपलब्धता के अलावा महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने का भी है। 'बैंकिंग सखी’ को चार हजार रुपये महीना मानदेय मिलेगा।
क्या होगा बैंक सखी का काम
'बैंकिंग सखी’ की तैनाती उत्तर प्रदेश के गांवों में की जाएगी। ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं को लेकर होने वाली समस्या और जरूरतों के लिये सरकार की ये पहल बेहद अहम है। ये 'बैंकिंग सखी’ घर-घर जाकर उन्हें बैंकिंग सुविधाएं दिलाने में मदद करेंगी। ग्रामीण इलाकों में अक्सर तमाम लोगों की बैंकिंग संबंधित समस्याएं होती हैं, सरकारी योजनाओं के अनुदान, पेंशन व जनधन अकाउंट के लिये भी उन्हें बैंकिंग सिस्टम से रूबरू होना पड़ता है। ऐसे में बैंकिंग सखी उनके लिये काफी मददगार साबित होंगी।
आईआईबीएफ देगा प्रशिक्षण
'बैंकिंग सखी’ के रूप में चयनित महिलाओं को इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस प्रशिक्षित करेगा। अगले छह माह तक उन्हें 4000 रुपये मानदेय के रूप में दिये जाएंगे। इसके अलावा सरकार की ओर से इन महिलाओं को डिजिटल डिवाइस खरीदने के लिये 50,000 रुपये दिये जाएंगे। इन्हें लेनदेन पर कमीशन भी दिया जाएगा।
Published on:
09 Nov 2020 10:54 am
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