
अप्रैल-मई में नहीं होंगे पंचायत चुनाव! Source- Patrika
UP Panchayat Chunav 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा बदलाव आ रहा है। पहले अनुमान था कि अप्रैल-मई 2026 में चुनाव होंगे, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सरकार के हलफनामे के बाद अब यह संभव नहीं लग रहा। पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने कहा था कि अप्रैल से जुलाई के बीच चुनाव हो जाएंगे, लेकिन अब ऐसा होने की उम्मीद कम है। सरकार ने कोर्ट को साफ कहा है कि पहले पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC आयोग) का गठन होगा, फिर चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पिछड़ा वर्ग आयोग यानी उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग एक सरकारी संस्था है। यह उन जातियों और वर्गों की देखभाल करती है, जो सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हैं, लेकिन अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) में नहीं आते। इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कहा जाता है। यह आयोग 1996 के कानून के तहत बना है। इसका मुख्य काम पिछड़े वर्गों की सूची बनाना, उनमें बदलाव सुझाना और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सलाह देना है। यह आयोग शिकायतें सुनता है, जैसे किसी जाति को पिछड़े में शामिल करने या हटाने की मांग। यह आरक्षण के फायदों की जांच भी करता है और सरकार को रिपोर्ट देता है। पंचायत चुनावों में OBC के लिए आरक्षण तय करने के लिए आयोग जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण के लिए ऐसा आयोग होना चाहिए, जो तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट दे।
आयोग के सदस्य (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य) सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं। यह पिछड़ों की आबादी का सर्वे कर सकता है। पंचायत चुनाव के लिए अब रैपिड सर्वे (तेज सर्वे) करने की बात है। सर्वे से पता चलता है कि किस इलाके में OBC कितनी आबादी है। उसी के आधार पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की सीटों पर आरक्षण तय होता है। आयोग रिपोर्ट तैयार करता है, जो सरकार को भेजी जाती है। फिर सरकार अधिसूचना जारी करती है और आरक्षण लागू होता है। पुराना आयोग अक्टूबर 2025 में खत्म हो चुका था, इसलिए नया समर्पित आयोग बनाना जरूरी हो गया।
अप्रैल-मई में चुनाव होने की उम्मीद अब नहीं है। पहले अनुमान अप्रैल-जुलाई तक का था, लेकिन हाईकोर्ट में सरकार के हलफनामे से साफ है कि पहले आयोग गठन और उसकी रिपोर्ट आएगी। याचिका में कहा गया था कि पुराना आयोग वैध नहीं है, इसलिए नया बनाना जरूरी। कोर्ट ने याचिका खत्म कर दी, क्योंकि सरकार ने प्रक्रिया शुरू करने की बात कही। लेकिन चुनाव पहले नहीं हो सकते।
चुनाव टलने की संभावना ज्यादा है। आयोग गठन में समय लगेगा। गठन के बाद रैपिड सर्वे, रिपोर्ट तैयार करना और अधिसूचना जारी होना, इन सबमें कम से कम 2-3 महीने या ज्यादा लग सकते हैं। अगर आयोग जल्दी बनता है और सर्वे तेजी से होता है, तो जुलाई के बाद या अगस्त-सितंबर में चुनाव हो सकते हैं। लेकिन अगर देरी हुई तो 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक खिंच सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह प्रक्रिया 2 महीने ले सकती है, लेकिन वास्तव में ज्यादा समय लगना आम है।
आयोग गठन के बाद सदस्यों की नियुक्ति और काम शुरू होने में 15-30 दिन। रैपिड सर्वे में 1-2 महीने (जिला स्तर पर डेटा इकट्ठा करना)। रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजने में 15-30 दिन। सरकार द्वारा आरक्षण अधिसूचना और चुनाव कार्यक्रम घोषणा में 1 महीना। कुल मिलाकर आयोग बनने के बाद 3-6 महीने लग सकते हैं। इसलिए चुनाव अप्रैल-मई से काफी पीछे खिसक सकते हैं। वहीं अब सभी की नजरें ओपी राजभर के नए बयान पर टिकी है। ओपी राजभर का पंचातय चुनाव को लेकर अगल बयान ही चुनाव की रफ्तार को तैय करेगा और साफ होगा कि चुनाव किस महीने में कराए जाएंगे।
Published on:
14 Feb 2026 10:22 am
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