शिक्षा मित्रों को राहत देने के लिए अब जो विकल्प हैं उसके मुताबिक प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर सकती है। वहीं 1.37 लाख शिक्षा मित्रों में से 30 हजार शिक्षा मित्र टीईटी पास हैं। प्रदेश सरकार उन्हें नई भर्ती निकालकर तुरंत समायोजित कर सकती है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा में भी शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था। लेकिन त्रिपुरा सरकार अब उन्हें गैर शैक्षणिक पदों पर समायोजित करने जा रही है। उत्तर प्रदेश में भी विभिन्न विभागों में करीब दो लाख से अधिक पद रिक्त हैं। सरकार चाहे तो यूपी के शिक्षा मित्रों को भी गैर शैक्षणिक पदों पर समायोजित कर सकती है। सरकार के सामने एक रास्ता ये भी है कि शिक्षा मित्रों को वर्तमान में मिल रहे वेतन पर पदनाम बदलकर स्कूलों में पढ़ाने का मौका दिया जा सकता है। एक रास्ता और है जिसके मुताबिक शिक्षा मित्रों के पढ़ाने के अनुभव को देखते हुए केेन्द्र सरकार टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने का अध्यादेश लेकर आए और उनको सहायक शिक्षक पद पर समायोजित करे। अब केंद्र और राज्य सरकार शिक्षा मित्रों को राहत देने के लिए क्या रास्ता निकालती है, यह देखने वाली बात होगी।