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UP Tourism Funding: लखनऊ मंडल में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, 34 परियोजनाओं पर सरकार खर्च करेगी 16.35 करोड़ रुपये

UP Religious Tourism : लखनऊ मंडल के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 34 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। करीब 16.35 करोड़ रुपये की लागत से प्राचीन मंदिरों, तीर्थस्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों का कायाकल्प होगा, जिससे रोजगार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Aug 08, 2025

Lucknow Tourism Development फोटो सोर्स : Patrika

Lucknow Tourism Development फोटो सोर्स : Patrika

UP Heritage and Culture: उत्तर प्रदेश सरकार ने राजधानी लखनऊ और आसपास के जनपदों में पर्यटन विकास को एक नई उड़ान देने के लिए 34 प्राचीन और धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत इन परियोजनाओं पर लगभग 16 करोड़ 35 लाख 75 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इस घोषणा की जानकारी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से लखनऊ मंडल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत पहचान दिलाई जाएगी।

राज्य स्तरीय बजट और परियोजना का दायरा

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के लिए 4,40,000 लाख रुपये का मूल बजट प्रावधान किया गया है।
  • इनमें 350 नई परियोजनाओं के लिए लगभग 35,985 लाख रुपये की धनराशि रखी गई है।
  • वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में क्रियान्वित हो रही परियोजनाओं के लिए 28,000 लाख रुपये की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है।
  • लखनऊ मंडल के अंतर्गत आने वाले लखनऊ, लखीमपुर खीरी और उन्नाव जिलों में कुल 34 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जिन पर 16.35 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होगी।

लखीमपुर खीरी में धार्मिक स्थलों का कायाकल्प

मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि लखीमपुर खीरी के सदर विधानसभा क्षेत्र में स्थित माता बेलहियाधाम का विकास किया जाएगा। इसके अलावा –

  • पलिया,
  • श्रीनगर,
  • धौरहरा,
  • कस्ता

क्षेत्रों के मंदिरों और तीर्थ स्थलों के लिए भी धनराशि स्वीकृत की गई है। इन स्थलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर, सौंदर्यीकरण और पर्यटक सुविधाओं में सुधार किया जाएगा।

लखनऊ जिले में 20 से अधिक परियोजनाएं

  • लखनऊ जिले में कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए पर्यटन विकास परियोजनाएं अनुमोदित हुई हैं। इनमें –
  • मलिहाबाद का शीतला माता मंदिर
  • चौक स्थित कोनेश्वर महादेव मंदिर (लखनऊ पश्चिम)
  • प्राचीन शिव मंदिर (लखनऊ कैंट)
  • बी.के.टी. का मां कालिका देवी मंदिर
  • मोहनलालगंज का प्राचीन हनुमान मंदिर शामिल हैं।

इसके अलावा, सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र के महादेव जलसाई नाथ जी प्राचीन मंदिर, श्री ज्वाला मां मंदिर बरिगवां, एलडीए कॉलोनी लखनऊ उत्तरी का संझिया घाट (गोमती नदी तट), राम जानकी मंदिर (लखनऊ मध्य), घटघटा बाबा देव स्थान सालेहनगर माल (मलिहाबाद), याहियागंज गुरुद्वारा, लॉर्ड बुद्धा संस्थान (सरोजनी नगर), और कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान (बी.के.टी.) का उच्चीकरण किया जाएगा।

सांस्कृतिक और आधुनिक पर्यटन स्थलों का समावेश

  • पर्यटन मंत्री ने बताया कि योजना में केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आधुनिक और सांस्कृतिक पहचान वाले स्थान भी शामिल हैं।
  • मोहनलालगंज के हुलासखेड़ा का पर्यटन विकास
  • सरोजनीनगर में इकाना स्टेडियम के पास नौसेना शौर्य संग्रहालय का निर्माण एवं क्यूरेशन
  • लखनऊ कैंट के चारबाग में रवींद्रालय का पर्यटन विकास
  • सरोजनीनगर के कानपुर रोड बाराबिरवा स्थित संत रविदास मंदिर
  • लखनऊ पूर्वी विधानसभा का दिगंबर जैन मंदिर
  • पर्यटन भवन गोमती नगर के द्वितीय तल का उच्चीकरण
  • इन परियोजनाओं से धार्मिक, सांस्कृतिक और शहरी पर्यटन को संतुलित रूप से बढ़ावा मिलेगा।

उन्नाव में विरासत संरक्षण की योजनाएं

लखनऊ मंडल का हिस्सा उन्नाव जिला भी इस योजना में खास स्थान रखता है। यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में –

  • ठाकुरद्वारा मंदिर बंदाखेड़ा (सदर विधानसभा)
  • महादेव मंदिर, बेहटा (मुजावर ग्राम)
  • भिन्गी हनुमान मंदिर, सफीपुर
  • बिल्लेश्वर बाबा धाम, पुरवा
  • विंदेश्वर महादेव मंदिर, बांगरमऊ
  • कालिका माता मंदिर, भगवंत नगर
  • बनना देवी मंदिर, मुलाहिमपुर
  • नगाड़ेश्वर न्यास मंदिर, मुन्नेखेड़ा (हसनगंज)
  • का पर्यटन विकास किया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री पर्यटन सहभागिता योजना का लाभ

इन परियोजनाओं के साथ-साथ, कुछ उच्चादेशों पर प्रस्तावित परियोजनाएं और मुख्यमंत्री पर्यटन सहभागिता योजना के तहत भी नए कार्य किए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय निकायों, निजी क्षेत्र और समुदायों को पर्यटन विकास में भागीदार बनाना है।

पर्यटन मंत्री का बयान

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि "सरकार का प्रयास है कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं का लक्ष्य केवल ढांचागत विकास नहीं, बल्कि स्थानीय कला, संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखना है।

संभावित लाभ

  • इन परियोजनाओं के पूरे होने के बाद –
  • पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खास कर गाइड, होटल, परिवहन और हस्तशिल्प क्षेत्र में।
  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को इन स्थलों की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्वता समझाई जा सकेगी।
  • पर्यटन नक्शे पर लखनऊ मंडल की पहचान और मजबूत होगी।