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उ.प्र.माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कहा शिक्षकों का हो रहा शोषण

शिक्षक पूर्ण रूप से प्रबन्धक की कृपा पर सेवा कर रहे हैं।

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उ.प्र.माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कहा शिक्षकों का हो रहा शोषण

लखनऊ , उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम की धारा 7 (कक) का लोप करके वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को शोषण से मुक्ति दिलाये।विधान परिशद में शिक्षक दल के नेता एवं उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 1987 में संशोधन करके तत्कालीन सरकार ने इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम की मान्यता सम्बन्धी धारा में धारा 7 (क) जोड़कर वित्तविहीन मान्यता दिलाने की व्यवस्था की थी।

शिक्षक पूर्ण रूप से प्रबन्धक की कृपा पर सेवा कर रहे हैं।

उक्त संशोधन में स्पष्ट कहा गया है कि अन्तरिम व्यवस्था के रूप में अंषकालिक शिक्षक की नियुक्ति का प्राविधान किया गया है। पत्र में यह भी स्पष्ट कहा गया है कि उक्त संषोधन अधिनियम में धारा 7 (कख) का समावेश करके ऐसी व्यवस्था की गयी है कि अंशकालिक कहा जाने वाला शिक्षक किसी प्रकार भी 1971 के वेतन वितरण अधिनियम का लाभ न उठा सके । साथ ही यह भी व्यवस्था है कि अंशकालिक शिक्षक चयन बोर्ड अधिनियम की सेवा सुरक्षा सम्बन्धी धारा से भी लाभान्वित नहीं होंगे। तात्पर्य यह है कि अन्तरिम व्यवस्था के रूप में नियुक्त किये गये अंशकालिक शिक्षक शोषण के लिए प्रबन्धकों की कृपा पर छोड़ दिये गये हैं। यह अन्तरिम व्यवस्था विगत् 31 वर्ष से चली आ रही है और इस व्यवस्था में कार्यरत शिक्षक पूर्ण रूप से प्रबन्धक की कृपा पर सेवा कर रहे हैं।

शोषण से मुक्ति प्रदान की जाय

पत्र में शिक्षक संघ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश भारतीय गणराज्य का कल्याणकारी राज्य है। भारत का संविधान में शोषण वर्जित है किन्तु माध्यमिक शिक्षा अधिनियम की धारा 7(कक) षोशण की वर्जना का पूर्णतः खुला विरोधी है। मॉग की गयी है कि कल्याणकारी राज्य के नाते शोषणकी इस व्यवस्था को अध्यादेश द्वारा संशोधित करके समाप्त किया जाय और कार्यरत शिक्षकों को पूर्णकालिक शिक्षक के रूप में मान्य करते हुए उन्हें शोषण से मुक्ति प्रदान की जाय। पत्र में अधिनियम की विभिन्न धाराओं को उद्धृत करते हुए कहा गया है कि कोई अन्तरिम व्यवस्था 31 वर्ष के अन्तराल तक अन्तरिम नहीं रह सकती है, यह पूर्णतया असंवैधानिक है।

अन्तरिम व्यवस्था का सहारा लेकर विधायिका को भ्रमित किया

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1987 का यह संशोधन इसलिए लाया गया था कि क्यांकि उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षक संघ ने अपने संघर्षों एवं आन्दोलनों के द्वारा यह व्यवस्था सुनिश्चत करा ली थी कि प्रदेश में कोई माध्यमिक विद्यालय असहायिक नहीं रहेगा और यह व्यवस्था वर्ष 1987 तक प्रभावी रही। इसी कारण तत्कालीन सरकार ने अन्तरिम व्यवस्था का सहारा लेकर विधायिका को भ्रमित किया था।

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