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जानिए : वसंत पंचमी पर ज्ञान प्राप्ति के लिए करें पूजा, मां सरस्वती की उपासना का है श्रेष्ठ पर्व

Vasant Panchami 2018 : आज मां सरस्वती की उपासना का पर्व वसंत पंचमी पर सोमवार को लखनऊ राजधानी में हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ मनाई जा रही है।

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  Basant Panchami

Vasant Panchami 2018 : आज मां सरस्वती की उपासना का पर्व वसंत पंचमी पर सोमवार को लखनऊ राजधानी में हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ मनाई जा रही है। इस बार वसंत पंचमी पर 14 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है क्योंकि इस बार वसंत पंचमी का पर्व सोमवार के दिन पड़ा है जिससे वसन्त पंचमी का महूत्व और भी बढ़ गया है।

पंडित दिलीप दुबे के मुताबिक धर्म ग्रंथों के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है और इसी दिन ज्ञान व संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती जयंती पूजा पाठ महाआरती प्रसाद वितरण के साथ धूमधाम से मनाई जाती है।

ज्ञान प्राप्ति के लिए बच्चे करें मां सरस्वती की आराधना

पंडित दिलीप दुबे मुताबिक वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि तेज होती है। जो बच्चे पढ़ाई-लिखाई में अधिक कमजोर होते हैं, उन्हें इस दिन मां सरस्वती की आरधना एवं पूजा पाठ करना चाहिए। इससे उनकी बुद्धि प्रखर होती है एवं पढ़ाई-लिखाई में मन एकाग्रित होता है। वसंत पंचमी के उपलक्ष्य में मां चामुंडा दरबार में विशेष पूजा पाठ की जाती है।

स्कंद पुराण के अनुसार करें पूजन

स्कंद पुराण के अनुसार वसंत पंचमी के दिन सफेद फूल, चंदन, एवं सफेत वस्त्र धारण करके देवी सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान भगवान गणेश का भी ध्यान करना चाहिए।

वाणी और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करें

जिस ज्ञान और वाणी के बिना संसार की कल्पना करना भी असंभव है, और माता सरस्वती उसी की देवी हैं। अत: मनुष्य ही नहीं, देवता और असुर भी उनकी भक्ति भाव से पूजा करते हैं। बसंत पंचमी इसी देवी सरस्वती पूजा का दिन है। इस दिन अपने-अपने घरों में माता की प्रतिमा स्‍थापित करके उनकी पूजा करनी चाहिए। कई पूजा समितियों द्वारा भी बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले सरस्वती जी की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखें। इसके बाद कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत् पूजा करें, फिर सरस्वती जी की पूजा करें। सबसे पहले उन्‍हें आचमन और स्नान कराएं, इसके बाद फूल, माला चढ़ाएं। सरस्वती जी को सिन्दूर, और श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। वसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित करें। देवी सरस्वती श्वेत वस्त्र धारणी हैं, इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं, परंतु फल पीले रंग का चढ़ाएं। प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदी भी अर्पित कर सकते हैं। कई स्‍थानों पर इस दिन सरस्वती माता को मालपुए और खीर का भी भोग लगाया जाता है।

सरस्वती पूजन के लिए करें हवन पूजन

वसंत पंचमी पर पूजा करने बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना करें। हवन के लिए हवन कुण्ड अथवा भूमि पर सवा हाथ चारों तरफ नापकर एक निशान बना लें। अब इस भूमि को कुशा से साफ करके गंगा जल छिड़ककर पवित्र करें और यहां पर हवन करें। हवन करते समय गणेश जी, नवग्रह के नाम से हवन करें। इसके बाद सरस्वती माता के नाम से 'ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा" इस मंत्र से एक सौ आठ बार हवन करें। हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें और हवन का भभूत लगाएं और मंत्र का जाप करें।

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।1।।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं । वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।

हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्। वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।