सैफई से जुुड़े होने के कारण मैनपुरी के लोग वहां से प्रतिस्पर्द्धा करते भी नजर आते हैं। पुसैना गांव के बाहर एक दुकान पर बैठे मूलचंद, संजीव दीक्षित, सियाराम व मंशाराम कश्यप एक साथ बोल पड़े, ये मैनपुरी है सैफई नहीं। यहां बिजली नहीं आती, राशन नहीं मिलता। फिर बोले, सैफई में आपको एक भी बेरोजगार नहीं मिलेगा, यहां रोजगार के अवसर ही नहीं हैं। राशन दुकानदार न राशन देता है न मिट्टी का तेल और कोई सुनने वाला भी नहीं है। यह सिर्फ इस बस्ती का गुस्सा हो सकता है किन्तु लोग खुलकर कहते मिले कि मुलायम परिवार की लड़ाई दिखावा है और जनता का गुस्सा कम करने के लिए ये सब हो रहा है। नगला कबर के सोनेलाल कहते हैं कि इस बार सब कुछ उतना आसान नहीं होगा। जनता जवाब मांगेगी और जवाब न दे पाने की सजा भी सुनाएगी।