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हमने तो नेताजी को सौंपी थी मैनपुरी, उनने तेजू को पकड़ाय दई

मुलायम के गढ़ माने जाने वाले इस जिले के लोग हैं निराश, चुनाव में मिलेगी कड़ी चुनौती

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Sanjeev Mishra

Jan 11, 2017

mainpuri voter

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ड़ॉ.संजीव


मैनपुरी.
समाजवादी पार्टी के शीर्ष पुरुष मुलायम सिंह यादव के घर सैफई से आठ किलोमीटर दूरी पर है मैनपुरी जिले का कस्बा करहल। हम यहां सड़क किनारे बैठे कुछ लोगों को देेखकर रुकते हैं तो पता चला है कि वहां भी परिवार प्रपंच चल रहा है। बुजुर्ग रामाधीन के मुंह से निकला, नेताजी ने यह ठीक नहीं किया। हमने उन्हें मैनपुरी सौंपी थी, उन्होंने तेजू को पकड़ा दी। वहां मौजूद अन्य लोगों ने उनकी हां में हां मिलाई तो पीछे से आवाज आई, अब तो अपने लड़के से भी लड़ रहे हैं। दर्द भरी टीस के साथ महेश बोले, जो हो रहा है, ठीक नहीं हो रहा। लोग निराश हैं और इस चुनाव में सब कुछ पहले जैसा आसान नहीं होगा।

दरअसल मैनपुरी समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है। 1996 में मैनपुरी ने सांसद के तौर मुलायम सिंह को मैनपुरी सौंपी थी। उसके बाद पिछले लोकसभा चुनाव में मुलायम चौथी बार यहां से जीते, पर यह सीट उन्होंने अपने पोते तेज प्रताप यादव उर्फ तेजू को सौंप दी। तेजू की टीम यहां सक्रिय भी है किन्तु आम आदमी निराश है। भोगांव के आलोक शाक्य कहते हैं कि नेताजी इस बार मैनपुरी को भूल सा गये हैं। वे यहां आते ही नहीं। तेजप्रताप की स्थिति भी यही है। उन्हें बैठे-बिठाए सांसदी मिल गयी तो आम जनता से मिलना भी जरूरी नही समझते। बेवर में मिले राधेश्याम कहते हैं कि मुलायम बस इटावा से सटे करहल तक के होकर रह गए हैं। उन्हें पूरी मैनपुरी ने सम्मान दिया था, पर वे सबके न हो सके। वे मानते हैं कि मैनपुरी में विकास तो हुआ है किन्तु परेशानियां नहीं घटीं। वैसे मैनपुरी से अखिलेश का सीधा जुड़ाव भले ही न हो किन्तु युवा उनके साथ है।


न बिजली न राशन
सैफई से जुुड़े होने के कारण मैनपुरी के लोग वहां से प्रतिस्पर्द्धा करते भी नजर आते हैं। पुसैना गांव के बाहर एक दुकान पर बैठे मूलचंद, संजीव दीक्षित, सियाराम व मंशाराम कश्यप एक साथ बोल पड़े, ये मैनपुरी है सैफई नहीं। यहां बिजली नहीं आती, राशन नहीं मिलता। फिर बोले, सैफई में आपको एक भी बेरोजगार नहीं मिलेगा, यहां रोजगार के अवसर ही नहीं हैं। राशन दुकानदार न राशन देता है न मिट्टी का तेल और कोई सुनने वाला भी नहीं है। यह सिर्फ इस बस्ती का गुस्सा हो सकता है किन्तु लोग खुलकर कहते मिले कि मुलायम परिवार की लड़ाई दिखावा है और जनता का गुस्सा कम करने के लिए ये सब हो रहा है। नगला कबर के सोनेलाल कहते हैं कि इस बार सब कुछ उतना आसान नहीं होगा। जनता जवाब मांगेगी और जवाब न दे पाने की सजा भी सुनाएगी।


हमें तो बस सुरक्षा दे दो
कांशीराम कालोनी में परचून की दुकान लगाए चंद्रपाल का गुस्सा पूरी व्यवस्था पर फूट पड़ता है। वे बोले ये बाप-बेटा आपस में लड़ते ही रहेंगे या जनता के बारे में भी सोचेंगे। उनके गुस्से से जुड़ते हुए सलीम ने कहा, जब उनसे घर ही नहीं संभल रहा तो प्रदेश क्या संभलेगा। फिर संयत होकर बोले, ये आपस में लड़ते हुए नहीं समझते कि सिर्फ इनका परिवार नहीं टूटता, इनसे जुड़ी लोगों की उम्मीदें टूटती हैं। वहीं मौजूद विशना देवी कहती हैं, कुछ ऐसा करा दो कि सड़क पर निकलना आसान हो जाए। अभी तो बच्चे कहीं जाएं तो चिंता लगी रहती है। नगला जुला के धीरेंद्र सिंह व कमलेश कहते हैं कि लोकसभा चुनाव की बात अलग थी। इस बार तो फिर जाति के आधार पर ही वोट पड़ेगा।