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जब बैंडिट क्वीन और जोधा अकबर रिलीज हो सकती है, तो पद्मावत का विरोध क्यों ?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से ये बात साफ कर दी थी कि फिल्म पद्मावत 25 जनवरी को देशभर में रिलीज होगी।

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लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से ये बात साफ कर दी थी कि फिल्म पद्मावत 25 जनवरी को देशभर में रिलीज होगी। बावजूद इसके करणी सेना को ये बात स्वीकार नहीं है कि फिल्म रिलीज हो। इतिहास के पन्नों को खंगाला जाए, तो ये बात सामने आती है कि रानी पद्मावती और खिलजी से जुड़े इतिहास और साहित्य के पन्नों में दर्ज विवरण विरोधावासी तथ्य सामने लाते हैं । फिल्म का विरोध करने वालों का दावा है कि रानी पद्मावती की छवि के साथ छेड़छाड़ की गयी है। हालांकि, ये कितनी सच है और कितनी गलत, ये तो फिल्म देखने पर पता लग ही जाएगा। करणी सेना का आरोप है कि इतिहास के तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है।

देशभर में पद्मावत को लेकर विवाद बना हुआ है। लेकिन सवाल ये है कि इससे पहले हिस्टॉरिक सीरियल जैसे जोधा अकबर, चित्तौड़ की रानी पद्मिनी की जौहर, झांसी की रानी, चंद्रगुप्त मौर्या, द ग्रेट मराठा आदी सीरियल शुरू हुए थे। ताज्जुब की बात ये है कि इन टीवी शोज में कभी ऐसी किसी बात को लेकर विवाद खड़ा नहीं हुआ। इस तरह बैंडिट क्वीन फिल्म भी बिना किसी खास विवाद के सिनेमा घरों में रिलीज हुई थी।

फिल्म देखकर ही पता लगेगा विरोध लायक है या नहीं

ये सारे शोज थोड़े फिक्शनल तो थोड़े रिअल आर्ट वर्क रहे। लेकिन कभी इन सीरियल्स को लेकर कोई विवाद उत्पन्न नहीं हुआ। हिस्टोरियन योगेश प्रवीण ने पद्मावत पर अपना स्टैंड देते हुए उन्होंने कहा कि फिल्म में क्या है और क्या नहीं, ये तो फिल्म देख कर ही पता लगेगा। इसके लिए फिल्म का विरोध नहीं किया जाना चाहिए। जब तक फिल्म नहीं देखेंगे, तब तक पता कैसे चलेगा कि उसमें क्या है और क्या नहीं।

पहले नहीं हुआ कुछ ऐसा विवाद

अब तक जितने हिस्टोरिक शोज बनाए गए हैं, उनको लेकर कोई खास विवाद उत्पन्न नहीं हुआ। चाहे छोटा पर्दा हो या बड़ा पर्दा, अगर हिस्टोरिक मुद्दों पर कोई फिल्म या शो बन रहा है, तो उस पर विवाद करने से पहले पूरी तरह से उसे देख लेना चाहिए।

लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र विभाग के प्रो. कविराज बताते हैं कि पद्ममावत पर विरोध बेकार है। हम जब तक फिल्म देखेंगे नहीं, तब तक पता कैसे लगेगा क्या है ऐसा जो नहीं होना चाहिए था फिल्म में। जब फिल्म देखा ही नहीं, तो विरोध करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। करणी सेना का आरोप है कि संजय लीला भंसाली को छवि के साथ छेड़छाड़ करना पसंद है। रानी पद्मिनी और खिलजी के बीच दिखाए गए दृश्य गलत हैं। लेकिन ये तो फिल्म देख कर ही पता लग पाएगा कि विरोध करने लायक उस फिल्म में कौन सा सीन है।

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