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कौन थे डॉ. नित्या आनंद? जानें कैसे लाए गर्भनिरोधक गोली सहेली

मेडिकल साइंटिस्ट डॉ. नित्या आनंद को देश में पहली नॉन हार्मोनल और नॉन-स्टेरॉयड गर्भनिरोधक गोली विकसित करने का श्रेय दिया जाता है।

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लखनऊ

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Upendra Singh

Feb 01, 2024

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मेडिकल साइंटिस्ट डॉ. नित्या आनंद का फाइल फोटो।

डॉ. नित्या आनंद का 99 साल की उम्र में लखनऊ में निधन हो गया। डॉ. नित्या आनंद को 2012 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉ. नित्या आनंद का PGI में इलाज चल रहा था। गर्भरोधक पिल के अलावा मलेरिया, कुष्ठ रोग और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में मददगार दवाओं को बनाने में भी नित्या आनंद की भूमिका अहम रही है।

डॉ. नित्या आनंद ने सेंट स्टीफंस कॉलेज से केमेस्ट्री में मास्टर की डिग्री हासिल की
डॉ. नित्या आनंद का जन्म 1 जनवरी 1925 को पंजाब के लायलपुर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई लायलपुर में हुई। 1943 में इन्होंने लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज यूनिवर्सिटी से बीएससी की डिग्री हासिल की। सेंट स्टीफंस कॉलेज से केमेस्ट्री में मास्टर की डिग्री हासिल की। 1948 में मुंबई की यूनिवर्सिटी ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी ने पीएचडी की डिग्री दी। इसके बाद डॉ. नित्या आनंद कैम्ब्रिज यूके चले गए। 1950 में दूसरी पीएचडी की डिग्री हासिल की।

सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर
साल 1951 में भारत आने के बाद वो लखनऊ के सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्‍टीट्यूट(CSIR) में वैज्ञानिक के तौपर पर शामिल हुए। इस संस्‍थान का काम नई दवाओं की खोज करना है। 1963 में डॉ. नित्या आनंद को मेडिसिनल केमिस्ट्री डिवीजन का हेड बनाया गया। 1974 में इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर बने। 1984 तक डायरेक्टर का कार्यभार संभाला। CSIR से अलग होने के बाद भी कई दशकों तक भारत सरकार की विभिन्न दवा नीति निर्माण निकायों जुड़े रहे। कई वैज्ञानिक संस्‍थानों में सलाहकार के तौर पर भी काम किया।


गर्भनिरोधक गोली सहेली कैसे लाए
डॉ. नित्या आनंद को सहेली नाम की गर्भनिरोधक गोली बनाने के लिए जाना गया। समय को देखते हुए इस गोली को बनाया गया था। साल 1960 के दशक में भारत सरकार को एक स्वदेशी और प्रभावी बर्थ कंट्रोल गोली की जरूरत थी। उस समय डॉ. नित्या आनंद और लखनऊ के CSIR-CDRI की उनकी टीम ने सहेली गोली को बनाने की शुरुआत की। कई सालों की कड़ी मेहनत के बाद 1971 में भारत की पहली नॉन-स्टेरॉयड और नॉन-हार्मोनल गर्भनिरोधक गोली बनी।

क्लिनिकल टेस्ट के बाद सहेली पिल को बाजार में पेश किया गया
क्लिनिकल टेस्ट के बाद सहेली पिल को बाजार में पेश किया गया। हर सप्ताह इसकी एक तय खुराक लेने से अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने में सफलता मिली। इसका कोई गंभीर साइड इफेक्ट भी नहीं देखा गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1986 में सहेली पिल को लॉन्च किया। बाद में सरकार के राष्ट्रीय परिवार कार्यक्रम में इसे शामिल किया गया। 1995 में सहेली को पूरे भारत में प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर और विभिन्न फार्मेसी स्टोरों पर मुफ्त में उपलब्ध कराया गया।

डॉ. नित्या आनंद के 90 छात्रों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया
डॉ. नित्या आनंद के 90 छात्रों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया है। डॉ. नित्या आनंद ने लगभग 400 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए। 2 पुस्तकों के संपादक भी रहे। लगभग 130 राष्ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय पेटेंट हासिल किए।