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13 दिनों में महिला ने 4 हजार किलोमीटर साइकिल चलाकर बनाया रिकॉर्ड, उम्र जानकर हो जाएंगे हैरान

ये कहानी है जाबांज प्रीति की जिन्होंने हम सबके सामने एक नया ही रिकॉर्ड बनाया है | पांच साल पहले बीमारी से लड़ने के लिए शुरू किया साइकिल चलाना और आज जीत लायीं ख़िताब | उम्र जान कर रह जाएंगे हैरान।

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लखनऊ

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Upendra Singh

Nov 22, 2022

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एक 45 साल की महिला ने 13 दिन साइकिल से यात्रा कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है | इस दौरान इन्होनें 4 हजार किलोमीटर की दूरी तय की है | इन्होंने अपनी यात्रा गुजरात से शुरू की और अरुणाचल पहुंचकर सफर पूरा किया |

इस अभियान दल के प्रमुख घनश्याम रघुवंशी ने सोमवार को मीडिया को बताया की प्रीति मस्के पुणे की निवासी हैं| इन्होंने अपनी यात्रा 1 नवंबर को पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा के कोटेश्वर मंदिर से अपनी सफर की शुरुआत की |

उत्तर प्रदेश के 8 शहरों में हुआ स्वागत
6 नवंबर को उत्तर प्रदेश के 8 शहरों से होते हुए निकली थीं | यहां के लोगों ने जगह जगह पे इनका स्वागत किया | ये उत्तर प्रदेश के उन्नाव, लखनऊ, कामता, कस्बैलचौली, चंदौली, मतौली, अयोध्या, और बस्ती से होकर आगे बढ़ीं | प्रीति ने ये सफर तय करके साबित कर दिया है कि अगर, जज्बा सच्चा हो तो मंजिल को पाने में उम्र कभी बाधा नहीं बनती | प्रीति मस्के, दो बच्चो की माँ, ने अपनी यात्रा के बीच लगभग 7 राज्यों को पार किया है और वो राज्य हैं:- गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश|

प्रीति ने रोज लगभग 19 घण्टे चलाया साइकिल
इस अभियान दल के प्रमुख घनश्याम रघुवंशी ने बताया कि प्रीति ने लगातार 13 दिनों तक 19 घंटे और 12 मिनट तक साइकिल चलायी | इसमें इन्होंने 3,995 किलोमीटर की दुरी तय की | क्यूंकि उन्हें अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा के नजदीक किबिथू पहुंचना था |
14 नवंबर की रात में प्रीति किबिथू पहुंच चूँकि थी | प्रीति की इस उपलब्धि को ‘वर्ल्ड अल्ट्रा साइक्लिंग एसोसिएशन’ और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने मान्यता दी है | इसके अतिरिक्त, प्रीति ने देश की पहली महिला सिंगल साइकिलिस्ट होने का खिताब भी हासिल कर लिया है |


बीमारी की वजह से शुरू की थीं साइकिल चलाना
आज से करीब पांच साल पहले प्रीति ने बीमारी की वजह से साइकिल चलाना शुरू की थीं | प्रीति ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "इस लम्बी यात्रा के दौरान बहुत सी कठिनाइयां भी आयीं और कई तरह की मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा | असम और अरुणाचल में ऊंचाई, बिहार के दरभंगा में तेज हवाओं और अरुणाचल प्रदेश के तेजू में ख़राब सड़क के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा | साइकिल चलाने में नींद से झूझना एक बहुत बड़ी चुनौती थी| इस चुनौती का सामना मैंने कॉफी के सहारे किया |"

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