
लखनऊ. विश्व न्यायाधीशों के 18 वें सम्मेलन के समापन के मौके पर लखनऊ में जजों ने मंगलवार को संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया। इस सम्मलेन की शुरुआत 11 नवंबर को हुई थी। सम्मेलन में वर्तमान समय में दुनिया भर में चल रहे तनावों सहित अमेरिका और उत्तरी कोरिया के बीच चल मंडरा रहे युद्ध के संकट पर भी चर्चा हुई। जजों ने दुनिया भर में शान्ति की स्थापना और मेल-मिलाप बढ़ाने के लिए विश्व संसद, विश्व सरकार, विश्व मुद्रा और विश्व न्यायालय की स्थापना को जरूरी बताया। इस सम्मेलन में छह देशों के प्रधानमत्रियों, पूर्व और वर्तमान राष्ट्राध्यक्षों सहित 56 देशों से आये मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों और कानूनविदों ने हिस्सा लिया। सिटी मांटेसरी स्कूल हर वर्ष इस सम्मेलन का आयोजन करता है।
कार्यक्रम हिस्सा लेने आये गयाना के उपराष्ट्रपति खेमराज रामजतन ने कहा कि ऐसे आयोजन आमतौर पर सरकारें या अंतर्राष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं ही करती हैं। कार्यक्रम के दौरान 9500 से अधिक बच्चों दुनिया भर के विषयों और समस्याओं की जानकारी हासिल करने के साथ ही महत्वपूर्ण सवालों के माध्यम से अपनी रूचि भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही तुवालु के गवर्नर जनरल इकोबा टी इटालेली, क्रोशिया के पूर्व राष्ट्रपति स्तेपान मैसिक, लिसोथो के पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर पकलिथा बिथुएल मोसीसिली, मॉरीशस के राष्ट्रीय संसद की स्पीकर शांतिबाई हनुमान , घाना के ऱाष्ट्रीय संसद की स्पीकर प्रोफेसर आरो माइकिल ओकवायो व अन्य प्रतिनिधि भी सम्मेलन के दौरान मौजूद रहे।
कार्यक्रम के संयोजक डाक्टर जगदीश गाँधी ने बताया कि सम्मेलन के बाद घोषणा पत्र जारी किया है। सम्मेलन के सभी प्रतिनिधि प्रयास करेंगे कि सभी राज्यों और सरकारों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाए जिसमें ऐसे कदम उठाये जाएं कि एक वैश्विक सरकार का प्रभावशाली ढांचा तैयार हो सके, जिसके अंतर्गत विश्व कानून बनाने के लिए विश्व संसद का गठन हो, जिसके द्वारा विश्व सरकार और विश्व न्यायालय की स्थापना की जा सके। डाक्टर गांधी ने कहा कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच चल रहे तनाव सहित सभी विवादों को खत्म करने के लिए प्रयास किये जाएं।
Published on:
14 Nov 2017 04:37 pm
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