
महंगा हुआ घर का सपना...
लखनऊ. सुस्ती से सहमे रियल इस्टेट सेक्टर को दोहरा झटका। प्रदेश सरकार ने संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर अधिकतम फीस की सीमा को समाप्त कर दिया है। अब संपत्ति की कीमत का एक फीसदी शुल्क वसूला जाएगा, लेकिन अधिकतम 20 हजार रुपए की सीमा को समाप्त कर दिया गया है। ऐसे में बीस लाख रुपए से अधिक कीमत का मकान, दुकान, जमीन खरीदने पर अधिक खर्च करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त सरकार ने दूसरे प्रदेश से आने वाली बालू, मौरंग, गिट्टी आदि उपखनिज पर अब 'सेस' लगाने का फैसला किया है। ऐसे में गिट्टी, मौरंग आदि की कीमतों में वृद्धि होना भी तय है। अलबत्ता आवास विकास और प्राधिकरणों की योजनाओं के बकायेदार आवंटियों को राहत देने के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को लागू करने का निर्णय राहत देने वाला है।
पचास लाख की जायदाद खरीदने पर 30 हजार ज्यादा
योगी कैबिनेट के बीते दिवस रियल इस्टेट सेक्टर के संबंध में लिए गए फैसले के मुताबिक, अब प्रदेश में संपित्तयों की खरीद में रजिस्ट्री में दर्ज कीमत पर दो फीसदी के बजाय एक फीसदी निबंधन शुल्क वसूला जाएगा। इस फैसले को यूं समझिए कि अभी तक यदि आप पांच लाख रुपए कीमत की संपत्ति खरीदते तो दो फीसदी यानी दस हजार रुपए रजिस्ट्री शुल्क देना पड़ता। इसी प्रकार दस लाख या अधिक मूल्य की संपत्ति खरीदने पर अधिकतम बीस हजार रुपए निबंधन शुल्क जमा करना पड़ता था। नई व्यवस्था में पांच लाख की संपत्ति खरीदने पर पांच हजार, जबकि दस लाख की संपत्ति खरीदने पर दस हजार रुपए शुल्क जमा करना होगा, लेकिन संपत्ति की कीमत बीस लाख से अधिक हुई तो अधिकतम सीमा बीस हजार के बजाय नई दर पर निबंधन शुल्क अदा करना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर पचास लाख कीमत का मकान खरीदने पर अब बीस हजार नहीं, बल्कि पचास हजार रुपए निबंधन शुल्क अदा करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि स्टाम्प रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 में वर्णित भू-सम्पत्ति की कुल कीमत का 2 प्रतिशत या अधिकतम 20 हजार रजिस्ट्रीकरण शुल्क के बजाय भू-सम्पत्ति की कुल कीमत का एक प्रतिशत रजिस्ट्रीकरण शुल्क वसूल किया जाएगा। इस फैसले से राज्य सरकार को करीब 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।
दूसरे राज्यों की सस्ती बालू-मौरंग और गिट्टी पर टैक्स
रियल इस्टेट सेक्टर पर दोहरी मार के रूप में योगी सरकार ने पड़ोसी राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वाले बालू, मौरंग, गिट्टी आदि उपखनिज पर अब 'सेस' लगाने का फैसला किया है। सरकार का दावा है कि सीमावर्ती राज्यों से आने वाले उपखनिजों एवं प्रदेश में उपलब्ध उपखनिजों के बाजार मूल्यों में समानता लाने के लिए ऐसा किया गया है। सीमावर्ती राज्यों से आने वाली उपखनिजों पर राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर शुल्क यानि 'सेस' लगाए जाने के लिए उपखनिज परिहार नियमावली-1963 में संशोधन किया गया है। दरअसल, प्रदेश में उपलब्ध उपखनिजों जैसे बालू, मौरंग, बजरी, खण्डा, गिट्टी, बोल्डर आदि का खनन उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली-1963 के तहत ई-निविदा सह ई-नीलामी प्रणाली के जरिये उच्चतम बिड के आधार पर स्वीकृत किया जाता है, जबकि सीमावर्ती राज्यों में उपखनिजों के खनन पट्टे रायल्टी दर पर स्वीकृत होते हैं। ऐसे में पड़ोसी राज्यों से आने वाली मौरंग, गिट्टी आदि की कीमत कम होती थी, जोकि इस फैसले से बढ़ना तय है।
बकायेदारों को राहत, विकास प्राधिकरणों में ओटीएस योजना
अलबत्ता सूबे की सरकार ने विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की योजनाओं के बकायेदार आवंटियों को राहत देने के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना से प्रदेश में 33926 डिफाल्टर आवंटियों को लाभ मिलेगा। दरअसल, विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद के आवंटी अधिक ब्याज होने की वजह से बकाया पैसा जमा कर मकान व जमीनों पर कब्जा नहीं ले रहे हैं। राज्य सरकार ने ऐसे डिफाल्टर आवंटियों की सुविधा के लिए ओटीएस योजना लाने का फैसला किया है। ओटीएस गणना के बाद 50 लाख तक के बकाएदारों को चार माह और 50 लाख से अधिक के बकाएदारों को सात माह में पैसा जमा करने की सुविधा दी जाएगी। पूरा पैसा एक साथ देने वाले आवंटियों को दो फीसदी अतिरिक्त छूट मिलेगी। इस योजना से विकास प्राधिकरणों और आवास विकास को 1814.99 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।
Published on:
06 Feb 2020 12:57 pm

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