
Sonam Wangchuk अनशन पर | Credit- CJP
Sonam Wangchuk Hunger Strike : दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे हैं। 28 जून 2026 से शुरू हुआ यह 'आंदोलनकारी उपवास' अब अपने 18वें दिन में पहुंच चुका है, और उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 8.5 किलो वजन घट चुका है, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक गिर चुके हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका भी दाखिल हो चुकी है जिसमें उन्हें जबरन अस्पताल ले जाने और फोर्स-फीड करने की मांग की गई है।
खास बात यह है कि यह उनका पहला अनशन नहीं है। उनके अपने शब्दों में, यह छठी बार है, और इस बार उन्होंने "छह हफ्ते या मृत्यु" तक जाने की कसम खाई है। एक्टर शबाना आजमी, स्वरा भास्कर, नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकार उनसे अनशन खत्म करने की अपील कर चुके हैं।
जब भी कोई आंदोलनकारी अन्न का त्याग करता है, इतिहास के पन्ने खुद खुल जाते हैं। भारत में अपनी मांगों के लिए जान दांव पर लगाने का लंबा इतिहास रहा है। आइए, तथ्यों की पुष्टि के साथ जानते हैं उन 8 भारतीयों की कहानी जिन्होंने अनशन में प्राण गंवाए, और विज्ञान की नजर से समझते हैं कि भूख हड़ताल शरीर के साथ क्या करती है।
फोरेंसिक मेडिसिन के शोध पत्रों के मुताबिक, जिसमें भूख हड़ताल में हुई मौतों के पोस्टमॉर्टम अध्ययन शामिल हैं - मृत्यु सिर्फ 'भूखा रहने' से नहीं, बल्कि मल्टी-ऑर्गन फेलियर से होती है, जिसमें गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) और हृदय की अनियमित धड़कन (वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन) भी शामिल हो सकते हैं। यह प्रक्रिया चरणों में चलती है:
शरीर सबसे पहले लिवर में जमा शुगर (ग्लाइकोजन) को करीब 24-48 घंटों में इस्तेमाल कर लेता है, फिर 'कीटोसिस' अवस्था में जाकर ऊर्जा के लिए फैट पिघलाना शुरू करता है। यही कारण है कि शुरुआती हफ्तों में वजन तेजी से गिरता है - काफी हिस्सा पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से भी होता है।
फैट भंडार घटने पर शरीर अपनी मांसपेशियों के प्रोटीन को तोड़कर ऊर्जा जुटाने लगता है। एक महीने के बाद या करीब 18% वजन घटने पर शरीर को स्थायी नुकसान शुरू हो सकता है - निगलने में दिक्कत, सुनने-देखने की क्षमता प्रभावित होना, अंगों का काम धीमा पड़ना।
पोस्टमॉर्टम अध्ययनों में लिवर, पैनक्रियाज और हृदय की मांसपेशियों तक में सिकुड़न (atrophy) पाई गई है। शोध बताते हैं कि 45 दिनों के बाद संक्रमण या हृदय गति रुकने से मौत का खतरा काफी बढ़ जाता है। यदि पानी भी पूरी तरह बंद कर दिया जाए तो यह प्रक्रिया कहीं तेज़ हो जाती है - किडनी तीसरे दिन तक ही जवाब देना शुरू कर सकती है।
चिकित्सकीय समझ के मुताबिक जब शरीर का वजन बहुत ज्यादा (व्यापक रूप से करीब एक-तिहाई तक) घट जाता है, तब शरीर के अंग इतने कमजोर पड़ चुके होते हैं कि भोजन या ग्लूकोज को ठीक से पचा नहीं पाते। इस स्थिति में अचानक दोबारा खिलाना भी खतरनाक हो सकता है। इसीलिए लंबी भूख हड़ताल के बाद मेडिकल निगरानी में ही आहार दोबारा शुरू किया जाता है।
Updated on:
15 Jul 2026 02:56 pm
Published on:
15 Jul 2026 02:55 pm
