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दर्द सुनाने अब घर-घर जाएंगे प्रेरक, वर्षों सेवाएं लेने के बाद सरकार ने किया बेरोजगार

शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महती भूमिका निभाने वाले प्रेरक अब अपना दर्द बताने घर-घर जाएंगे।

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दर्द सुनाने अब घर-घर जाएंगे प्रेरक, वर्षों सेवाएं लेने के बाद सरकार ने किया बेरोजगार

महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में आठ वर्षों से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महती भूमिका निभाने वाले प्रेरक अब अपना दर्द बताने घर-घर जाएंगे। शासन ने उनकी सेवा समाप्त कर दी है, इसके चलते वे बेरोजगार हो गए हैं।

इस मुद्दे को लेकर शिक्षा प्रेरक संघ जिला महासमुंद की बैठक गुरुवार को जिला मुख्यालय में हुई। संघ के पदाधिकारियों बताया कि प्रेरकों ने 2011 से 2018 तक लगभग 8 वर्ष निरंतर सेवाएं दी। अपने मूल कार्य के अलावा विभिन्न विभागों द्वारा सौंपे गए जनकल्याणकारी कार्य जैसे राशन कार्ड सर्वे, शौचालय निर्माण, आवास निर्माण, स्वच्छ भारत मिशन, श्रमिक पंजीयन, मनरेगा, जनधन खाता, मतदाता जागरुकता अभियान, प्रधानमंत्री बीमा योजना, 3-4 वर्षों से शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के दौरान अध्यापन कार्य, आधार पंजीयन आदि कार्य भी प्रेरकों ने पूरी जिम्मेदारी के साथ पूरा किया, लेकिन सरकार ने प्रेरकों के प्रति उदासीन रवैया अपनाया।

मांगों के लिए जन समर्थन
प्रेरक संघ ने कई बार अपनी मांगों के संदर्भ में शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, लेकिन सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी गई। अब प्रेरकों ने संकल्प लिया है कि अपनी मांगों को लेकर ग्रामीण और शहरी हॉट बाजार में जन-जागरुकता करेंगे और गली-मोहल्लों में दीवार लेखन, जन-चौपाल, रैली व घर-घर जाकर अपनी मांगों के लिए जन समर्थन जुटाएंगे। प्रेरक संघ के पदाधिकारियों ने छग के सभी वर्ग के कर्मचारी संघों से भी समर्थन की अपील की है। बैठक में तीरिथ राम धुव, बालाराम साहू, कृष्णा साहू, सत्यखोजी, हिरामन, गणेश, मेनका, संतोषी, मीनू, किशन निर्मलकर, संतोष निषाद आदि मौजूद थे।

ये हैं मांगें
प्रेरकों की सेवा बहाल, प्रेरकों को सम्मान जनक वेतन, वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के घोषणा पत्र में किए वादे के अनुसार प्रेरकों को शिक्षाकर्मी के रूप में संविलियन, प्रेरकों को छग राज्य का कर्मचारी घोषित जैसे मांगें शामिल हैं। इन मांगों को लेकर प्रेरक अब घर-घर पहुंचेंगे।

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