- गुरु नानक देव 518 साल पहले जिस गांव में ठहरे थे वहां बनेगा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल और स्कूल। - महासमुंद के गढ़फुलझर में विशाल गुरुद्वारे के लिए भी रखी गई नींव।
सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव अपनी उदासियों (धार्मिक यात्राओं) के दौरान छत्तीसगढ़ आए थे। यहां उन्होंने भैना वंश की रियासत गढ़फुलझर (महासमुंद) में 2 दिन बिताए थे। पिछले साल ही यह बात एक शोध के दौरान सामने आई। इसके तुरंत बाद ही राज्य सरकार ने इसे पर्यटन स्थल घोषित कर दिया। अब छत्तीसगढ़ के अलावा देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में यहां साध-संगत जुटने लगे है। दर्शनार्थियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए गढ़फुलझर में विशाल गुरुद्वारे का निर्माण करवाया जा रहा है। गुरु नानक देव ने चूंकि मानव सेवा का संदेश दिया था। लिहाजा, सिख समाज यहां मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, स्कूल और धर्मशाला खोलने की तैयारी में है। इसके लिए तकरीबन 12 एकड़ जमीन का चयन किया जा चुका है।
आसपास कहीं भी सर्वसुविधायुक्त अस्पताल नहीं हैं। ऐसे में सिख समाज की यह पहल इलाके के लोगों के लिए काफी मददगार साबित होगी। समाज ने तय किया है कि यहां निशुल्क इलाज के साथ निशुल्क शिक्षा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। गांव में निर्माण कार्यों की शुरुआत हो चुकी है। इसके देखरेख के लिए मैनेजर, सुपरवाइजर समेत 4 सदस्यीय स्टाफ कर्मी की ड्यूटी भी लगाई गई है।
कभी कोई एफआईआर नहीं, सारे घर गुलाबी
गढ़फुलझर से सटा नानक सागर गांव है। यहां एक चबूतरा है। इसे लेकर मान्यता है कि गढ़फुलझर में रुकने के दौरान गुरुनानक देव इस पर बैठे थे। इस गांव की सबसे बड़ी खासियत है यहां की एकता। आज तक इास गांव में कभी किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जब कभी विवाद की स्थिति होती है, गांव के पंच-सरपंच और लोग उसी चबूतरे पर बैठकर हल निकालते हैं, जहां गुरुनानक देव ने विश्राम किया था। यही नहीं, इस गांव के सारे घर गुलाबी हैं।
समाज की अब बजट की मांग
पिछले प्रकाश पर्व पर यह बात सामने आई थी कि अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान गुरुनानक देव छत्तीसगढ़ आए थे। तब राजधानी में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समाज की मांग पर गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल घोषित किया। इन एक सालों में समाज ने गढ़फुलझर में कई तरह की धार्मिक गतिविधियां आयोजित करने के साथ निर्माण कार्यों की नींव भी रखी। प्रोजेक्ट काफी बड़ा है, जिस पर करोड़ों रुपए खर्च होने का अनुमान है। जानकारी के मुताबिक मंगलवार को पंडरी स्थित खालसा स्कूल में आयोजित समारोह में समाजजन सीएम के सामने गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए बजट में प्रावधान करने की मांग करेगा।
सेवा का केंद्र बनेगा गढ़फुलझर
गुरुनानक देव के आगमन की पुष्टि होने से गढ़फुलझर को वैश्विक पहचान मिलने लगी है। समाज द्वारा यहां विशाल गुरुद्वारे के साथ लंगर हॉल, धर्मशाला, मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल और स्कूल का निर्माण करवाया जाना है। इसके लिए सरकार से भी मदद मांगेंगे।
- महेंद्र छाबड़ा, अध्यक्ष, राज्य अल्पसंख्यक आयोग