
गांवों को जोड़ा और 85 एकड़ में 75 हजार पौधे रोपे, हेमलता राजपूत बनी जंगलों की सुरक्षा की मिसाल(photo-patrika)
Women Forest Protector: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में बीते 23 वर्षों से प्राकृतिक जंगलों में हरियाली बिखेर रही हेमलता राजपूत ने अब तक महासमुंद में 85 एकड़ जमीन पर लगभग 75 हजार पौधे रोपित किए हैं। उनका अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को कानूनी सहायता देने और युवाओं को जंगलों व प्रकृति से जोड़ने तक फैला हुआ है।
हेमलता ने महासमुंद ब्लॉक के 60 और बागबाहरा ब्लॉक के 30 गांवों में लोगों को प्राकृतिक वनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि जंगलों की सुरक्षा न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि यह गांववालों की सांस्कृतिक विरासत और आजीविका का साधन भी है। हेमलता के अभियान में अब पूरा गांव सक्रिय रूप से हिस्सा लेता है, महिलाएं जंगल से लकड़ी काटने के बजाय सूखी लकड़ियां जमा करती हैं और युवाओं को भी पेड़-पौधों की महत्ता समझाई जा रही है।
कोरोनाकाल में जब लोग घरों में कैद थे, तब हेमलता राजपूत और उनकी टीम ने गांव-गांव में पौधों की नर्सरी तैयार की। महुआ, नीम, आम जैसे पौधों की नर्सरी तैयार की गई और इसके माध्यम से गांवों में पौधों का वितरण किया गया। ग्राम पंचायतों का भी इस काम में सहयोग रहा। पिछले 7 सालों से नर्सरी डवलप की जा रही है और बीज संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
2025 में छत्तीसगढ़ में कोयला खदान और विकासात्मक परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वनों की कटाई जारी है, जिसमें केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में लगभग 6 लाख पेड़ कटने की संभावना है। इसके विपरीत, सरकार ने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत 3.85 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।
पेड़ों की कटाई (2025): सरगुजा जिले के केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए वन विभाग ने 1760 हेक्टेयर वन भूमि (जिसमें लगभग 99% घना जंगल है) को मंजूरी दी है, जहाँ करीब 6 लाख पेड़ कटने के कगार पर हैं। जुलाई 2025 में कोयला खनन परियोजना के विरोध में 5,000 से अधिक पेड़ काटने की खबर आई थी।
पेड़ लगाना (2025): 'एक पेड़ माँ के नाम' महावृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में वन विभाग 3.85 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का कार्य कर रहा है। यह स्थिति छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य जैसे जैव विविधता वाले क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण के बीच चल रहे संघर्ष को दर्शाती है।
हेमलता राजपूत का मुख्य उद्देश्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं है, बल्कि जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना है। उनके प्रयासों से न केवल हरियाली बढ़ रही है, बल्कि गांवों में समुदायिक सहयोग और जंगलों के संरक्षण की भावना भी मजबूत हो रही है।
Updated on:
27 Jan 2026 02:01 pm
Published on:
27 Jan 2026 02:00 pm
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