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सूखा: महासमुंद का भू-जलस्तर गिरा, 5000 hectare रबी फसल सूखी

जिले में भू-जल स्तर में भारी  गिरावट से सैकड़ों ट्यूबवेल ठप हो गए हैं, वहीं हजारों ट्यूबवेलों में पानी की धार टूटने लगी है

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Chandu Nirmalkar

Apr 18, 2016

Dry Rabi crop

Dry Rabi crop

महासमुंद
. जिले में भू-जल स्तर में भारी गिरावट से सैकड़ों ट्यूबवेल ठप हो गए हैं, वहीं हजारों ट्यूबवेलों में पानी की धार टूटने लगी है। इसके चलते रबी फसल की पर्याप्त ङ्क्षसचाई नहीं हो पा रही है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 5 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की फसल सूख गई है।


कहीं किसान अपनी फसल काटकर मवेशियों को खिला रहे हैं। तो कहीं पानी की कमी को देखते हुए छोर के खेतों में लगी फसल को छोड़ रहे हैं, ताकि बाकी फसल को बचा सकें। जानकारी के अनुसार जिले में करीब एक लाख हेक्टेयर में रबी की फसल ली जा रही है। इसमें करीब 35 हजार हेक्टेयर में धान की फसल ली जा रही है। महासमुंद, पटेवा, झलप, खल्लारी, बागबाहरा, पिथौरा, बसना तथा सरायपाली अंचल में भूजल स्तर में तेज गिरावट के अलावा लो-वोल्टेज और बिजली कटौती भी रबी रबी फसल पर संकट की बड़ी वजह हैं।


50 हजार से अधिक ट्यूबवेल

जिले में 50 हजार से अधिक ट्यूबवेल इस साल चालू हालत में थे। विद्युत विभाग से करीब इतने कनेक्शन ट्यूबवेलों को दिए गए हैं। इस साल सूखे के हालात में बड़ी संख्या में नए बोर कराए गए हैं। लेकिन जल स्तर घटने से कई पुराने और नए बोर भी ठप हो गए हैं। जानकारी के अनुसार जिले में भू-जल स्तर 280 से 320 फीट तक नीचे चला गया है। भूमिगत जल स्रोतों के सूखने के कारण पंपों में पानी नहीं आ रहा।


फसल मवेशियों को खिला रहे

ग्राम तेन्दुवाही में रबी फसल की हालत और भी खराब है। यहां सैकड़ों की संख्या में ट्यूबवेल हैं, लेकिन अधिकांश ठप हो गए हैं। यहां एक हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में रबी फसल लगाई गई थी। किसानों का कहना है कि रबी की आधी फसल भी नहीं बच पाएगी। दर्जनों किसान खेतों की फसल काटकर मवेशियों को खिला रहे हैं। वहीं कई किसानों ने फसल सूखने के लिए छोड़ दिया है।