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Padma Shri 2026: ‘गोमूत्र’ विवाद पर Zoho के संस्थापक का बड़ा वार, पद्म श्री IIT प्रोफेसर के अपमान को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस की पोस्ट पर प्रोफेसर कामकोटि की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन श्रीधर वेम्बू ने उनके समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया।

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भारत

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Ashib Khan

Jan 26, 2026

IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को मिलेगा पद्म श्री (Photo-IANS)

Padma Shri 2026: जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने पर कांग्रेस की टिप्पणी को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वेम्बू ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रोफेसर कामकोटि इस सम्मान के पूरी तरह हकदार हैं।

इसको लेकर श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा, “प्रोफेसर कामकोटि डीप टेक, खासकर माइक्रो-प्रोसेसर डिजाइन के क्षेत्र में काम करते हैं। वह IIT मद्रास के निदेशक हैं, जो भारत का सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संस्थान है। वह इस सम्मान के योग्य हैं।”

कांग्रेस ने किया था कटाक्ष

दरअसल, कांग्रेस की केरल इकाई ने पद्मश्री मिलने पर प्रोफेसर कामकोटि को लेकर एक कथित व्यंग्यात्मक पोस्ट किया था। पोस्ट में लिखा गया, “वी. कामकोटि को पद्मश्री मिलने पर बधाई। देश ने IIT मद्रास में गौमूत्र पर आपके अत्याधुनिक शोध को पहचाना और गौमूत्र को वैश्विक मंच तक पहुंचाया।”

वीडियो भी किया शेयर

इसके साथ, कांग्रेस ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें प्रोफेसर कामकोटि यह कहते नजर आते हैं कि पद्मश्री पुरस्कार उनके लिए ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में और बेहतर काम करने की प्रेरणा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन का भी जिक्र किया।

प्रोफेसर की तरफ से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया

कांग्रेस की पोस्ट पर प्रोफेसर कामकोटि की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन श्रीधर वेम्बू ने उनके समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया। वेम्बू ने कहा, “गाय के गोबर और गौमूत्र में बेहतरीन माइक्रोबायोम होता है, जो इंसानों के लिए उपयोगी हो सकता है।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ऐसे विषयों को खारिज करना “औपनिवेशिक मानसिकता” का नतीजा है। Zoho संस्थापक ने कहा, “जब तक हार्वर्ड या MIT जैसी संस्थाएं इस पर शोध न करें, तब तक कुछ लोग इसे विज्ञान मानने को तैयार नहीं होते। अगर वही बात वहां से आए, तो उसे अंतिम सत्य मान लिया जाता है।”

क्या है पूरा मामला?

कांग्रेस की यह टिप्पणी प्रोफेसर कामकोटि के पिछले साल दिए गए उस बयान से जुड़ी मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि गौमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं और यह IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) जैसी बीमारियों में मददगार हो सकता है।

बाद में प्रोफेसर कामकोटि ने यह भी कहा था कि अमेरिका की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में इस विषय पर शोध प्रकाशित हो चुके हैं। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने जून 2021 में ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला दिया था, जिसमें गाय के मूत्र में पाए जाने वाले पेप्टाइड्स की प्रोफाइलिंग की गई थी।

उस शोध में वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि गाय के मूत्र में मौजूद कुछ पेप्टाइड्स में ई. कोलाई और स्टैफिलोकोकस ऑरियस जैसे बैक्टीरिया के खिलाफ एंटीमाइक्रोबियल गतिविधि पाई गई है, हालांकि अन्य संभावित लाभों की पुष्टि के लिए और शोध की जरूरत बताई गई थी।

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