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Padma Shri 2026: कौन हैं 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिद्धू, जिन्हें मिलेगा पद्म श्री अवार्ड

1964 बैच के आईपीएस अधिकारी सिद्धू ने 1996 में पंजाब पुलिस में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद से सेवानिवृत्ति ली थी, लेकिन तीन दशक बाद भी उनका दिन सुबह 6 बजे शुरू होता है...

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भारत

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Ashib Khan

Jan 25, 2026

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पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू को मिलेगा पद्म श्री (Photo-X)

सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद भी जनसेवा का जज़्बा अगर जिंदा रहे, तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है। इसका जीवंत उदाहरण हैं पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू, जिन्होंने वर्दी उतारने के बाद भी समाज के लिए काम करना नहीं छोड़ा और वह भी झाड़ू उठाकर।

88 वर्षीय सिद्धू को 2026 गणतंत्र दिवस से पहले पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने कोई बड़ा पद या मंच नहीं चुना, बल्कि चंडीगढ़ की सड़कों की सफाई को अपना मिशन बनाया।

1964 बैच के आईपीएस अधिकारी सिद्धू ने 1996 में पंजाब पुलिस में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद से सेवानिवृत्ति ली थी, लेकिन तीन दशक बाद भी उनका दिन सुबह 6 बजे शुरू होता है- अपने इलाके, चंडीगढ़ के सेक्टर-49 की गलियों की सफाई से।

आईएएस-आईपीएस ऑफिसर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी में रहने वाले सिद्धू बताते हैं कि उन्होंने कई बार नगर निगम से शिकायत की, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने खुद ही जिम्मेदारी उठा ली।

उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से कहा, “सफाई में कोई शर्म नहीं है। स्वच्छता ईश्वर के समान है।”

पहले ‘पागल’ कहा गया, अब बना मिसाल

शुरुआत में लोग उन्हें “पागल” कहते थे। कभी थैले में, तो कभी छोड़ी गई रिक्शा में कचरा इकट्ठा कर वह उसे सही जगह पर फेंकते थे। धीरे-धीरे यह अकेली पहल एक सामूहिक आंदोलन में बदल गई। आज उनके परिवार और सोसाइटी के कई लोग उनके साथ जुड़ चुके हैं।

सिद्धू का मानना है कि ‘सिटी ब्यूटीफुल’ को स्वच्छ भारत सर्वेक्षण में देश में पहला स्थान हासिल करना चाहिए।

बता दें कि सिद्धू सेक्टर 49 में एक आईएएस/आईपीएस सोसाइटी में रहते हैं और अपना अधिकांश समय सोसाइटी और आसपास के इलाकों की सफाई में बिताते हैं। वे पंजाब के संगरूर जिले के धुरी में स्थित बुगरा गांव के रहने वाले हैं। 

उनके प्रयासों को पिछले साल तब मान्यता मिली जब 15 अगस्त को राज्यपाल द्वारा एक पुरस्कार की घोषणा की गई। हालांकि, सिद्धू इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए क्योंकि सोशल मीडिया पर अचानक मिली प्रसिद्धि के कारण वे घबरा गए थे।

सिद्धू मोबाइल फोन नहीं रखते और मीडिया से दूर रहते हैं। जब उनका वीडियो वायरल हुआ, तो वे चंडीगढ़ छोड़कर अपनी बेटी के साथ रहने चले गए। उन्होंने पहले बताया था कि स्वच्छता अभियान की प्रेरणा उन्हें सार्वजनिक सेवा में बिताए वर्षों और अमेरिका में अपने बेटे से मिलने के दौरान मिली।