सुकमा जिले के दोरनापाल, एर्राबोर आदि इलाकों से माओवाद पीडि़त बच्चियां कस्तूरबा निकेतन बेलसोंडा की गोद में फिर लौट रही हैं। कानूनी अड़चनों की वजह से उन्हें कुछ माह पूर्व वापस भेज दिया गया था। लेकिन वियोग से उनके चेहरे की मुस्कान छिन गई थी, वहीं उनके भविष्य को लेकर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया था। उनकी मुस्कान लौटाने और बेहतर भविष्य के लिए अभिभावक उन्हें अब स्वयं छोडऩे आ रहे हैं। माहभर में 53 बच्चियां यहां आ चुकी हैं, जिनमें 11 नई बच्चियां भी हैं। यहां कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट के आश्रय और ममता भरी छांव में उनका पालन-पोषण और बेहतर शिक्षा-दीक्षा हो रही है। बच्चियां बहुत खुश हैं और कस्तूरबा निकेतन की फिजां में भी रौनक लौट आई है।