
Motivational story of amit trivedi in hindi
एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले सिंगर-कम्पोजर अमित त्रिवेदी ने अपनी गीतों के दम पर बॉलीवुड में बहुत बड़ा नाम कमाया है। जानिए उनकी कहानी, उनकी ही जुबानी...
मैं गुजराती हूं। मुंबई में पला-बढ़ा अपनी सोसायटी का सबसे शरारती बच्चा। भाई-बहनों के बीच मां सबसे ज्यादा मुझे ही संभालते हुए थक जाती थीं। सात साल की उम्र में मैं पाइप से तीन मंजिल ऊपर चढ़ गया, एक बार अटारी पर चढक़र ऐसा सोया कि पिताजी मेरी फोटो लेकर मुझे रेलवे स्टेशन पर ढूंढऩे चले गए ... मैं अब शांत और शर्मिला हो गया हूं और महसूस करता हूं कि मेरी शरारतें अब मेरे संगीत में रच-बस गई हैं।
जिज्ञासा को बनाएं गुरु
पहला इंस्ट्रूमेंट जो मैंने बजाया, वह एक इलेक्ट्रॉनिक ***** थी जिसे मैंने अपने पड़ोसियों से उधार लिया था जब मैं 13 वर्ष का था। मैं इसे लेकर जुनूनी था और कभी इसे वापस नहीं देना चाहता था। मेरे मन में इसे लेकर काफी जिज्ञासा व रुचि थी। मेरी मां और बहनों को गाना पसंद था और हम घर पर ही मंडली जमाया करते थे। जब मैं कॉलेज में गया तो वहां मैंने फ्यूजन बैंड बनाया और कीबोर्ड बजाने लगा। ग्रेजुएशन के बाद अपने एक दोस्त के साथ विज्ञापन जिंगल बनाने लगा। गुजराती थिएटर के लिए संगीत देना भी शुरू कर दिया।
अपने मन को बोलने दें
हम अपने मन को मौका नहीं देते कि वह आपसे अपनी बात कह सके। हम एक के बाद एक कई प्रलोभनों में उलझे रहते हैं। जब आप मन की बात सुनेंगे ही नहीं तो उसकी इच्छा पर विचार कैसे होगा। 20 साल की उम्र में मैंने म्यूजिक कम्पोज करना शुरू किया, मैंने थिएटर के लिए काम किया है। टाइटल ट्रैक और टेली धारावाहिकों के लिए बैकग्राउंड स्कोर, विज्ञापन जिंगल, एलबम, लाइव प्रदर्शन, डांडिया शो, ऑर्केस्ट्रा सब किए। राजेश रोशन के लिए कीबोर्ड बजाया और अंत में यहां पहुंच गया- बॉलीवुड में! मन में छिपी असुरक्षा को बाहर निकालकर काम करें। काम से प्यार करें, आप देखेंगे कि सफलता एक बाइ-प्रोडक्ट है।
Published on:
31 Oct 2019 07:00 pm
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