
बाेया टमाटर, निकला सोना, मात्र पांच माह में कर ली 60 करोड़ की कमार्इ
नर्इ दिल्ली। कहते हैं भारत का दिल गांव में बसता है। गांव ही भारत की पहचान है। आज भारत के कर्इ गांव अपने खास विशेषताआें के लिए भी जाने जाते हैं। एेसे ही खास विशेषता वाला एक गांव उत्तर प्रदेश के अमरोहू में भी हैं। यूं तो उत्तर प्रदेश का ये जिला आम आैर राेहू के लिए भी जाना जाता था। लेकिन इस जिले में एक गांव 'सलारपुर' है जहां के किसान केवल टमाटर बेचकर सालाना अरबों रुपए की कमार्इ कर रहे है। इसी वजह से यहां के लोग टमाटर को 'लाल सोना' भी कहते हैं।
पांच माह में किया 60 करोड़ की कमार्इ
एक तरफ देशभर के किसानों काे खेती में लागत से भी कम कमार्इ हो रही वहीं अमरोहा के सलारपुर के किसान टमाटर से जमकर कमार्इ कर रहे हैं। सलारपुर में पिछले 20 वर्षों से बड़े पैमानें पर टमाटर की खेती की जा रही है। सबसे पहले बड़े पैमाने पर यहां टमाटर की खेती साल1998 में हुर्इ थी। टमाटर बेचकर यहां के किसानों ने पिछले पांच महीनें में 60 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। पिछले साल जब दिल्ली में टमाटर के दाम 80 रुपए के अपने उच्चतम स्तर पर था उस समय इस गांव के किसानों ने जमकर कमार्इ की। मिजोरम में 95 से 100 रुपए था तब टमाटर के बढ़ते मांग ने यहां के किसानों ने बेतहाशा कमार्इ की। दिल्ली के छह बड़ी मंडियों में भारी मात्रा में टमाटर का आवक सलारपुर से ही होता है। फिलहाल देश का शायद ही कोर्इ एेसा कोना हो जहां सलारपुर से टमाटर का आयात न होता हो। यहां के लोगों को सालान एक बीघे में टमाटर की खेती से एक लाख रुपए की बचत अासानी से हो जाती है।
कुश्ती छोड़कर करने लगे टमाटर की खेती
एक वेबसाइट 'याेरस्टोर' के मुताबिक, 20 साल पहले जब इस गांव में टमाटर की खेती नहीं शुरू हुर्इ थी तब यहां के लोगों को कुश्ती करना पसंद था। उस जमाने में ये गांव कुश्ती आैर पहलवानी में अपना लोहा मनवाता रहा था। लेकिन पहलवानी करने के लिए जब किसानों को पैसे की जरूरत पड़ी तो उन्होंने अपने पास मौजूद जमीनों में खेती करनी शुरू कर दी। देखते-देखते इस गांव में टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होने लगी। टमाटर की खेती ने इस गांव के पुराने पहचान को बदल दी है। लोगों के बीच अब ये गांव 'टमाटर वाले गांव' के नाम से जाना जाने लगा है।
टमाटर के बीज बेचकर भी करते हैं कमार्इ
इस गांव के किसानों की खास बात ये भी है कि यहां के किसान न सिर्फ टमाटर बेचकर कमार्इ करते हैं बल्कि टमाटर के बीज से भी उनकी मोटी कमार्इ होती है। योरस्टोरी के अनुसार जब उत्तर प्रदेश में ढेड़ क्विंटल टमाटर बीज की बिक्री हुर्इ थी। इस गांव में टमाटर की खेती करने वाले जुल्फीकार ने बताया की, गांव में जब रोजी राेटी का संकट गहरा गया तो ग्रामीणों ने टमाटर की खेती शुरू की थी। इसके बाद से यहां के लोगों की किस्मत चमक उठी। अब यहां के लोग टमाटर को लाल सोना भी कहते हैं।
30 गावाें के लोगों को मिलता है रोजगार
एक बार टमाटर की फसल पक के तैयार हो जाती है आैर इसकी बिक्री शुरू होती है तो इसके लिए बड़े स्तर पर श्रमिकों की आवश्यकता पड़ता है। इस वजह से इस जीले के करीब 30 गावों के लोग को रोजगार मिलता है। यहां पर दिहाड़ी पर काम करके ये श्रमिक एक दिन में तीन से चार सौ रुपए की कमार्इ कर लेते हैं।
Published on:
29 May 2018 02:39 pm

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