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कारगिल विजय दिवस: शहीद की पत्नी बेटी को सेना में भेजने के लिए कर रही तैयार, देखें वीडियो

विमलेश अपने शहीद पति की निशानी बेटी नीतू को सेना के लिए तैयार कर रही है। बेटी में भी अपने पिता की तरह देश के लिए कुछ करने का जज्बा है।

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Dhirendra yadav

Jul 26, 2017

Kargil vijay diwas 2017

Kargil vijay diwas 2017

मथुरा। कारगिल युद्ध में शहीद हुए रवि करन की पत्नी विमलेश देवी मथुरा की मांट तहसील के गॉव नावली में रहती हैं। शहीद ने कुर्बानी दी देश के लिए और विमलेश देवी ने स्वयं को परिवार के लिए समर्पित कर दिया। जो बच्चों को पाला-पोसा। विमलेश अपने शहीद पति की निशानी बेटी नीतू को सेना के लिए तैयार कर रही है। बेटी में भी अपने पिता की तरह देश के लिए कुछ करने का जज्बा है। कारगिल युद्ध को 18 साल हो गए हैं, इसके बाद भी सबकुछ आज भी याद है।
शहादत की रोमांचक दास्तान
शहीद रवि करन की पत्नी विमलेश देवी के शब्दों में पढ़िए शहादत की रोमांचक दास्तान- मेरे पति रवि करन की ड्यूटी कारगिल में टाइगर हिल पर थी। कारगिल युद्ध छिड़ गया। तीन बार मेरे पति ने दुश्मनों पर फतह हासिल की। जब चौथी बार टाइगर हिल पर युद्ध छिड़ा तो दुश्मनों को धूल चटाते हुए पाकिस्तान के छह जवानों को मार गिराया। इसी के दौरान उन्हें गोली लगी। उनके साथियों ने हमें बताया था कि गोली लगने के एक घंटे बाद तक रवि करन दुश्मनों का सामना करते रहे और कई दुश्मनों को मार गिराया। यह बात चार जुलाई, 1999 की है।
शहादत के बाद कैसे चलाया परिवार
पति की शहादत के बाद विमलेश ने अपने बच्चों की परवरिश अपने सास-श्वसुर के साथ मिलकर की। मेरे परिवार के लोगों ने साथ दिया। मुझे कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होने दिया। सुख हो या दुःख, हर घड़ी में परिवार मेरे साथ खड़ा रहा । पति के मरने के बाद मेरे और दोनों बच्चों का जीने का सहारा मेरा परिवार ही रहा और आज भी है। इन्हीं की वजह से मैंने अपने बच्चों को पढ़ाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी।
पति की शहादत पर गर्व
मुझे गर्व है कि मेरे पति कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। तब मेरे छोटे-छोटे बच्चे थे। एक बेटा और एक बेटी। उनको छोड़कर चले गए। यह बताते हुए शहीद की पत्नी विमलेश की आंखे भर आईं। कारगिल युद्ध से और आजतक वही यादें बनी हुई हैं। जब भी वे दिन याद आते हैं, आँखें भर आती हैं। साथ ही पति की शहादत पर गर्व होता है।
बेटी जाएगी सेना में
शहीद की बेटी नीतू बीएसए कॉलेज मथुरा से बीटेक कर रही है। उसने स्कूल भी टॉप किया था। बेटी को भी आर्मी में जाने की इच्छा है। उसने ठान रखा है कि वह भी आर्मी में जाकर देश की सेवा करेगी। विमलेश कहती हैं कि हमने भी तय किया है बेटी सेना में जाकर अपने पिता की तरह देश की सेवा करे। एक बेटा है शैलेन्द्र, जो इंटरमीडिएट में है।

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