उस्मानिया राज्य ने तथाकथित तौर पर इस्लामी कानून द्वारा शासित होने के बावजूद, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार सहित कई बुराइयों को प्रदर्शित किया क्योंकि वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमी थी। सत्ता के संयोजन में धर्म ने शासकों को अपनी शिकायतों के निवारण के लिए जनता के लिए बहुत कम जगह छोड़ी जो साम्राजय के पतन का कारण बनी। इसलिए गलतियों से सीख लेते हुए मुसलमानों को तथाकथित खिलाफत के दुष्प्रचार में नहीं फंसना चाहिए और लोकतांत्रिक मूल्यों में अपने विश्वास को मजबूत बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमकों धर्म के साथ अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को भी समझना चाहिए। हम किसी भी देश में रहे वहां के लोकतांत्रिक मूल्यों की कभी खिलाफत नहीं करे। इस दौरान वेबिनार में कारी सुलमान, डॉक्टर नुसरत, सूफी हाजी अरफान आदि ने भी अपने विचार रखें।