
कांग्रेस के बिना विपक्षी एकता संभव नहीं, गठबंधन के सभी साथियों ने भाजपा को छोड़ा: शिवसेना
नई दिल्ली। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चर्चा कुछ घंटों में शुरू होने को है, मगर इससे पहले शिवसेना ने सरकार का समर्थन नहीं करने का संकेत दिया है। अपने मुखपत्र सामना में पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से बयान आया है कि इस समय देश में तानाशाही चल रही है। इसका समर्थन करने की जगह वे जनता के साथ जाना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि देश कई समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में यह सरकार के लिए जवाब देने का समय है। वह अपने पिछले चार साल के कामकाज का ब्योरा देश के सामने उपलब्ध कराए। 543 सांसदों वाली लोकसभा में इस वक्त 11 सीटें खाली हैं,यानि लोकसभा में सांसदों की मौजूदा संख्या 532 है। इस लिहाज से बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 267 सीटों का है। फिलहाल बीजेपी के 272 सांसदों के साथ सरकार के पक्ष में कुल 295 सांसद हैं। ये आंकड़ा 313 का होता, लेकिन शिवसेना ने अपना रुख साफ नहीं किया है।
विरोध में 147 सांसद
उधर इसके विरोध में 147 सांसद हैं,जबकि शिवसेना के 18 सांसदों को मिलाकर यह संख्या 165 हो जाएगी। अब तक 90 सांसद अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या विरोध, ये फिलहाल साफ नहीं हो पाया है।
अब तक माना जा रहा था कि शिवसेना सरकार के साथ जाएगी। गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उद्धव को फोन किया था। इसके बाद खबरें आईं थीं कि शिवसेना मोदी सरकार के समर्थन में वोट करेगी। लेकिन आज सामना में पार्टी ने अप्रत्यक्ष रूप से साफ कर दिया है कि वोटिंग में वो मोदी सरकार का समर्थन नहीं करेगी। हालांकि पार्टी ने अभी तक इसका औपचारिक ऐलान नहीं किया है।
एआईएडीएमके का मिला समर्थन
एआईएडीएमके ने गुरुवार रात को सरकार के समर्थन का ऐलान किया है । पार्टी के 37 सांसदों का साथ मोदी को मिलेगा। अविश्वास प्रस्ताव सरकार का इम्तिहान कम बल्कि विपक्ष की परीक्षा ज्यादा है,क्योंकि संख्या बल सरकार के साथ है। बस देखना दिलचस्प ये होगा कि सरकार के खिलाफ विपक्ष कितनी मजबूती से टिक पाता है।
Published on:
20 Jul 2018 09:06 am
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