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सुप्रीम कोर्ट में भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

कोर्ट ने सरकार से कहा कि यह मसला गड़बड़ी फैलाने वाले या सरकार का तख्ता पलट करने वालों के बीच अंतर को समझने की है।
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Dhirendra Kumar Mishra

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Updated: 20 Sep 2018, 1:41 PM IST

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सुप्रीम कोर्ट में भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की सुनवाई में आज पूरी हो गई। शीर्ष अदालत ने इस मामले में अपने फैसले को आगे के लिए सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। बुधवार को कोर्ट ने गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा था कि यह एक गंभीर मसला है और इस केस में जल्‍दबाजी बरतने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने सरकार से कहा था कि असहमति और गड़बड़ी फैलाने वाले या सरकार का तख्ता पलट करने वालों के बीच अंतर को समझना होगा।

आपराधिक मामला

गुरुवार को इस मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्‍त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और मनिंदर सिंह ने कहा कि भीमा-कोरेगांव हिंसा प्रकरण एक आपराधिक मामला है। इस मामले में पीआईएल के जरिए अदालती कार्रवाई में हस्‍तक्षेप करना सही नहीं है। इससे गलत परंपरा को बढ़ावा मिलेगा। इसमे सारी कार्रवाई सीआरपीसी के तहत हो रही है। इससे पहले हुई सुनवाई में अतिरिक्‍त सॉलिसीटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा था कि जहां तक नक्सलवाद की समस्या का संबंध है तो यह अधिक बड़ी समस्या है। यह पूरे देश में फैल रही है। यह एक ऐसा मामला है जिस पर निचली अदालतों ने विचार नहीं किया है और ऐसा कौन सा पहलू है जिसने उनके दिमाग में यह संदेह पैदा किया कि निचले न्यायिक मंच उन्हें नहीं सुनेंगे। वहीं अतिरिक्‍त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं की सोच से इतर सरकार के पास उनके खिलाफ पर्याप्त सामग्री है। आप इन सबूतों से अभी शायद संतुष्ट न हों परंतु लैपटाप, कम्प्यूटर से मिले साक्ष्य से पता चलता है कि वे हिंसा में संलिप्त थे।

अपनाई गई प्रक्रिया गलत
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आज कहा कि फिलहाल हम इस मुद्दे पर बहस नहीं कर रहे हैं कि मामला सही है या नहीं। बल्कि भीमा-कोरेगांव मामले में जो प्रक्रिया अपनाई गई है वो गलत है। उन्‍होंने कि अदालत पहले ये तय करे कि इस मामले सही प्रक्रिया क्‍या है? उसके बाद हम इस मुद्दे पर बहस करेंगे कि जिन लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है वो सही है गलत। इससे पहले उन्‍होंने ने केंद्र और महाराष्ट्र की आपत्तियों को किताबी करार देते हुए कहा था कि आरोपों में दम नहीं है।

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