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दिल्ली सीलिंग: सर्वोच्च अदालत ने लगाई रोक, 11 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली में फिलहाल जो 351 सड़कें व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नोटिफाई होने की प्रक्रिया में है, अब उनपर अगली सुुनवाई तक सीलिंग नहीं होगी।
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नई दिल्ली

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Anil Kumar

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Updated: 14 Jun 2018, 8:16 PM IST

सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली सीलिंग: सर्वोच्च अदालत ने लगाई रोक, 11 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सीलिंग को लेकर मचे घमासान के बीच देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसले के लिए नई तारीख का ऐलान कर दिया है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई 11 जुलाई को होगी। बता दें कि दिल्ली में फिलहाल जो 351 सड़कें व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नोटिफाई होने की प्रक्रिया में है, अब उनपर अगली सुुनवाई तक सीलिंग नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कमेटी ने अदालत की बेंच के सामने मांग रखी की कि एमसीडी सीलिंग का काम नहीं कर रही है, जबकि ये 351 सड़कें अभी तक व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नोटिफाई नहीं हुई है। लिहाजा एमसीडी कोे सीलिंग जारी रखने का आदेश दिया जाए। बता दें कि कोर्ट ने कहा कि सीलिंग का मामला फिलहाल दूसरे जजों की बेंच सुन रही है जिसपर 11 जुलाई को सुनवाई होनी है। इसलिए निगरानी कमेटी अपनी बात 11 जुलाई को होने वाली सुनवाई के दौरन ही जजों के सामने रखें।

11 जुलाई तक नहीं होगी सीलिंग

आपको बता दें कि कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि 11 जुलाई तक कोई भी सीलिंग नहीं होगी। गौरतलब है कि अदालत ने कुछ समय पहले सीलिंग के लिए विशेष आदेश जारी किया था और केंद्र सरकार की अर्जी पर मास्टर प्लान 2021 के आदेश में संशोधन करने से इन्कार कर दिया था। केंद्र सरकार के मास्टर प्लान में संशोधन के लिए आम लोगों की आपत्तियां मांगनी होगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने अदालत में दाखिल अपनी अर्जी में कहा था कि डीडीए पहले ही लोगों से आपत्तियां ले चुका है। ऐसे में अब कोर्ट उस आदेश में संशोधन करे जिसमें कहा गया है कि 15 दिनों के अंदर आपत्तियां मंगवाएं। गौरतलब है कि बीते 15 मई को सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली के मास्टर प्लान 2021 में संशोधन पर नोटिफिकेशन पर लगी रोक के आदेश में संशोधन किया था और केंद्र सरकार को मास्टर प्लान में संशोधन के लिए आगे बढ़ने की इजाजत दी थी। बता दें कि बीते 6 मार्च को लगाई गई रोक के फैसले में संशोधन करते हुए अदालत ने 15 दिनों के अंदर जनता से आपत्तियां मांगने को कहा था और इसके लिए सभी बड़े अखबारों में दस दिन के अंदर तीन दिन लगातार आपत्तियों के लिए विज्ञापन देने के लिए कहा गया था।