जम्मू में ड्रोन हमले ने क्या भारत को नई लड़ाई के लिए किया आगाह? खतरे का संकेत

जम्मू वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र में कम तीव्रता वाले विस्फोट किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि ये ड्रोन हमला भारत के खिलाफ पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर का उदाहरण है।

नई दिल्ली। ऐसा पहली बार हुआ है, जिसमें ड्रोन में विस्फोटक लगाकर भारतीय सेना को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। भारतीय वायु सेना ने अधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि जम्मू वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र में कम तीव्रता वाले विस्फोट किए गए। वहीं दूसरी ओर ये बात साफ हो चुकी है कि यह हमला ड्रोन का उपयोग करके किया गया था। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला भारत के खिलाफ पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर का उदाहरण है। भारत को नई लड़ाई के लिए आगाह करता है।

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जम्मू-कश्मीर के इलाकों में ड्रोन का उपयोग

बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तान से सटी सीमाएं यानी पंजाब और जम्मू-कश्मीर के इलाकों में ड्रोन का उपयोग देखा गया है। इनका उपयोग हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स की तस्करी तक के लिए होता रहा है। मगर एक एयरबेस पर ड्रोन से हमला करा जाना साफ संकेत देता है कि ड्रोन के सटीक इस्तेमाल की क्षमताएं बढ़ गई हैं।

भारत-पाकिस्तान सीमा पर उड़ते ड्रोन

बीते कुछ सालों में भारत-पाकिस्तान की सीमा पर ड्रोन को उड़ान भरते देखा गया है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान जब भी किसी ड्रोन जैसे उपकरण को देखते हैं तो सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को उसके बारे में अलर्ट करते हैं। ये सुरक्षा एजेंसियां आपसी सामंजस्य से पता लगाने की कोशिश करती है कि ये ड्रोन थे या कुछ और।

ड्रोन को मार गिराया गया

बीते साल जून में बीएसएफ ने सीमा पार पाकिस्तान से एक ड्रोन को कठुआ में मार गिराया था। इस ड्रोन को मार गिराए जाने पर इससे एक सेमी-ऑटोमेटिक कार्बाइन, गोला-बारूद और ग्रेनेड की बरामदगी हुई थी। इस ड्रोन का वजन करीब 18 किलो था और यह 5-6 किलोग्राम का वजन लेकर उड़ान भर सकता था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस ड्रोन में ज्यादातर पुर्जे चीन में निर्मित थे।

बीते साल सितंबर में लोकसभा में ड्रोन हमले के खतरों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा कि देश में ड्रोन के खतरे का सामना करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। बीते वर्ष मार्च में इस विषय पर एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि उसने अहम सुरक्षा ठिकानों पर ड्रोन हमलों को रोकने के लिए एक मानक प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।

 

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ड्रोन का एक हथियार के तौर पर उपयोग होगा

भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन देखे जाते रहे हैं इससे यह अंदाज़ा लगाया जाना मुश्किल नहीं था कि वो दिन दूर नहीं जब ड्रोन को एक हथियार के तौर पर उपयोग किया जाएगा। जम्मू हमले के बाद से यह चर्चा हो रही है कि क्या भारत इस तरह के हमलों से निपटने को लेकर सक्षम है।

हथियारबंद ड्रोन का उपयोग किया

गौरतलब है कि आतंकवादियों ने कई जगहों पर हथियारबंद ड्रोन का उपयोग किया है। इस्लामिक स्टेट ने सीरिया में इसकी मदद से कई हमले किए हैं। ये तकनीकी परिष्कृत उपकरण नहीं हैं, जो इनका उपयोग हो रहा है। ये व्यावसायिक रूप से उपलब्ध ड्रोन हैं और आप बस उन्हें कुछ मात्रा में विस्फोटक के साथ लोड करेंगे।

ड्रोन से हमले हो सकते हैं घातक

ड्रोन उपयोग के रूप में बहुत प्रभावी उपकरण नहीं है। इसके बावजूद ये बेहद घातक सिद्ध हो सकते हैं। अमरीकी सेना बड़ी सटीकता और विनाशकारी शक्ति के साथ इसका उपयोग करती है। हर माह ड्रोन की 2-3 घटनाओं का पता चलता है।

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कई युद्धों में किया गया प्रयोग

भारतीय सेना के सेवानिवृत मेजर जनरल एसबी अस्थाना के अनुसार कई युद्धों में ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। वह अजरबैजान-आर्मेनिया संघर्ष हो या हमास के साथ इजराइल का टकराव, ड्रोन का उपयोग अक्सर किया जाता रहा है। पहले हथियार और नशीले पदार्थों को गिराने के लिए ड्रोन का उपयोग होता था। वहीं अब इसका उपयोग हमले के लिए हो रहा है। ये बेहद सटीकता से निशाना बनाता है। उनका कहना है कि ये बेहद खतरनाक है और आने वाले समय और भी घातक सिद्ध हो सकता है।

Mohit Saxena
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