
एक छात्रा और एक ही शिक्षक से चल रहा स्कूल, सालाना पढ़ाई का खर्च 8.5 लाख रुपए
रेवाड़ी। देशभर में कई स्कूल ऐसे हैं जहां छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। लेकिन हरियाणा के रेवाड़ी में एक स्कूल ऐसा भी है जहां सिरफ एक छात्रा है और एक ही शिक्षक है। एक और बड़ी बात यह है कि अकेली बच्ची को पढ़ाने पर यहां करीब साढ़े लाख रुपए हर साल खर्च हो रहे हैं। साल-दर-साल इस स्कूल में छात्राओं की संख्या घटती गईं और अब महज एक पर सिमट गई है। शिक्षक भी सिरफ पढ़ाई ही नहीं बल्कि सफाई की जिम्मेदारी भी खुद उठाते हैं। जिस हरियाणा से 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे नारे का आगाज हुआ हो वहां के कन्या विद्यालय में सिरफ एक छात्रा का पढ़ना हैरान करने वाला है।
...साल-दर-साल ऐसे घटी संख्या
- 2013 में यहां 22 लड़कियां पढ़ती थीं।
- 2014-15 में यह संख्या घटकर 12 रह गई।
- 2016-17 में इनकी संख्या दो-दो रहीं
- अब 2018 में एक ही छात्रा है, जो सातवीं कक्षा में पढ़ती है।
शिक्षक भी खुश नहीं
छात्रा को पढ़ाने का जिम्मा शिक्षक जयकिशन संभालते हैं। वे अकेले सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ाते हैं। पढ़ाने के साथ-साथ वे झाड़ू भी लगाते हैं। वे कहते हैं कि बच्ची को गांव के ही सीनियर सेकंडरी स्कूल में भेज देना चाहिए और उनकी ड्यूटी किसी दूसरे स्कूल में लगा देनी चाहिए, ताकि वे ठीक से अध्यापन कार्य कर सके। उनका कहना है कि इस स्कूल से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय है। जिसमें कुल 22 छात्र पढ़ने आते हैं।
एक बच्ची पर साढ़े 8 लाख खर्च
शिक्षक जयकिशन को 70 हजार रुपए मासिक यानी सालाना 8 लाख 40 हजार रुपए मिलते हैं। इसके अलावा विद्यालय का मैंटनेंस और बाकी खर्च भी होता है। इस तरह एक बच्ची की पढ़ाई का सालाना खर्च साढ़े आठ लाख रुपए से भी ज्यादा है। शिक्षक जयकिशन कहते हैं कि उन्हें भी यह अच्छा नहीं लगता। इस संबंध में अधिकारी भी उदासीन हैं।
...एक स्कूल ऐसा भी
एक अधिकारी के हवाले से लिखी गई रिपोर्ट के मुताबिक राजकीय माध्यमिक विद्यालय जाहिदपुर की स्थिति तो और भी बुरी है। इस सत्र में वहां अब तक एक भी बच्चे का दाखिला नहीं हुआ, जबकि उस स्कूल में एक मुख्य अध्यापक कार्यरत है। उन्होंने कहा कि सब कुछ पोर्टल पर मौजूद रहता है और विभाग को हर स्थिति की पूरी जानकारी होती है।
Published on:
16 Jul 2018 10:21 am
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