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भारत रत्न प्रणब मुखर्जी: कांग्रेस के लिए खपा दिया पूरा जीवन, पीएम मोदी मानते हैं पिता तुल्य

प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न मिलने की खबर आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनको बधाई दी है।
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Kapil Tiwari

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Updated: 25 Jan 2019, 10:04 PM IST

Pranab Mukherjee

Pranab Mukherjee

नई दिल्ली। भारत रत्न के लिए जिन तीन नामों का ऐलान किया गया है, उनमें सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद फोन कर प्रणब दा को बधाई दी है।

प्रणब मुखर्जी

- पश्चिम बंगाल के वीरभूम में जन्मे प्रणब मुखर्जी देश के पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। वो अपने आप में एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन कांग्रेसी विचारधारा के लिए खपा दिया। प्रणब दा देश के 13वें राष्ट्रपति रहे थे। प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न मिलने की खबर आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनको बधाई दी है।

- प्रणब दा के अलावा उनके पिता 1920 से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय रहे। इसके साथ-साथ पश्चिम बंगाल विधान परिषद में 1952 से 64 तक सदस्य और वीरभूम (पश्चिम बंगाल) जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके थे।

- उनका राजनीतिक जीवन करीब पांच दशक पुराना है, जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था। वो 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से सांसद चुने गए। 1973 में वो औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए। वो सन 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और और सन् 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने। उनके कार्यकाल की बदौलत ही उन्हें 1984 में, यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वेक्षण में उनका विश्व के सबसे अच्छे वित्त मंत्री के रूप में मूल्यांकन किया गया।

- वैसे तो प्रणब दा को कांग्रेस पार्टी के लिए दिए गए उनके योगदान के लिए ज्यादा जाना जाता है, लेकिन एक समय ऐसा आया था प्रणब दा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। दरअसल, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव के बाद राजीव गांधी की समर्थक मण्डली के षड्यन्त्र के कारण उन्हें मन्त्रिमणडल में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद ही उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस दल का गठन किया, लेकिन सन 1989 में राजीव गांधी के साथ समझौता होने के बाद उन्होंने अपने दल का कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया। 1995 से 1996 तक पहली बार वो विदेश मन्त्री रहे। 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया। 2012 से लेकर 2017 तक वो राष्ट्रपति के पद पर रहे।

- हाल फिलाहल में प्रणब दा आरएसएस के एक कार्यक्रम में जाने को लेकर विवादों में रहे थे। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच भी साझा किया था, जिसकी काफी आलोचना कांग्रेस पार्टी में हुई थी।