संकट में नौनिहाल: खून की कमी से जूझता ‘बचपन’, हरियाणा में सबसे बुरे हाल

Highlights.

- 5 साल तक के 58.5 फीसदी बच्चों में एनिमिया, तमिलनाडु में 50 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी

- 56 फीसदी बच्चे एनिमिक है, शहरी इलाकों में, गांवों में 59.5 फीसदी बच्चे पीडि़त

- शहरी इलाकों में 56 फीसदी तो ग्रामीण क्षेत्रों के 59.5 बच्चे शरीर में खून की कमी से ग्रस्त हैं

 

नई दिल्ली।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (एनएफएचएस-5) के आंकड़े बताते हैं कि छह से 59 महीने की आयु वाले 58.5 फीसदी बच्चे एनिमिक हैं। दूसरे शब्दों में इन बच्चों में रक्त की कमी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी यह सर्वे 2019-20 का है। शहरी बच्चों की तुलना में पांच साल तक की उम्र के छोटे बच्चे ग्रामीण इलाकों में एनिमिक ज्यादा हैं। शहरी इलाकों में 56 फीसदी तो ग्रामीण क्षेत्रों के 59.5 बच्चे शरीर में खून की कमी से ग्रस्त हैं।

बच्चों में एनिमिया के सबसे ज्यादा मामले हरियाणा राज्य में है। सर्वेक्षण के अनुसार 71.7 प्रतिशत बच्चे एनिमिक हैं। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में यह दर 72.9 फीसदी है। इस दृष्टि से सबसे बेहतर राज्य मणिपुर (19.1 प्रतिशत) है। तमिलनाडु में 50.4 फीसदी बच्चे इस रोग से ग्रस्त हैं। वैसे एनिमिक से सबसे ज्यादा प्रभावित केंद्रशासित प्रदेश दादर-नागर हवेली से है, जहां के 84.6 फीसदी बच्चों में खून की कमी है।

आयरन की कमी

चिकित्सकों के अनुसार खून की कमी होने का सीधा संकेत पोषाहार से है। बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिलने से एनिमिक होने की समस्या पैदा होती है। प्रसूता मां की सेहत का असर भी नवजात को प्रभावित करता है। बच्चों में आयरन की कमी होना और रक्त में लेड की मात्रा अधिक होने से भी बच्चों के एनिमिक होने की आशंका रहती है।

कद, कमजोरी और वजन के आंकड़े

देश में पांच साल तक की आयु के बच्चों के कद, विकास और वजन को भी सर्वे में जगह मिली है। इस दृष्टि से भारत में 38.4 फीसदी बच्चों का कद कम है। 21 फीसदी बच्चे कमजोर या अविकसित हैं तथा 35.7 फीसदी बच्चे आयु के अनुरूप कम वजन के हैं। आयु के अनुपात में ऊंचाई के मामले में बिहार सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ है। जहां 48.3 फीसदी बच्चे इस दायरे में आते हैं। कम वजन वाला अनचाहा रेकार्ड झारखंड (47.8 फीसदी) ने अपने नाम कर लिया है।

Ashutosh Pathak
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