Lockdown में Parle-G बिस्किट ने तोड़े 82 साल का रिकॉर्ड, लोगों को खूब आया पंसद, कंपनी का शेयर 5 फीसदी बढ़ा

 

Highlights
-पारले-जी (Parle- G) बिस्कुट की इतनी अधिक बिक्री हुई है कि 82 साल का रिकॉर्ड (Parle- G Record) तोड़ दिया है
- कंपनी के मुताबिक, लाॅकडाउन (Lockdown in india) के दौरान उसकी सेल पिछले 8 दशकों में सबसे ज्यादा रही
- ये पांच रुपए का पारले जी लोगों की भूख मिटाने के लिए काफी मददगार साबित हुआ

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus in india) का कहर बढ़ने के बीच भले ही हर दिन हज़ार करोड़ों का नुकसान (Coronavirus Effect) हो रहा है। कारोबार ठप पड़ने से आर्थिक गतिविधियों का नुकसान हुआ हो, लेकिन पारले-जी (Parle- G) बिस्कुट की इतनी अधिक बिक्री हुई है कि 82 साल का रिकॉर्ड (Parle- G Record) टूट गया है। कंपनी के मुताबिक, लाॅकडाउन (Lockdown in india) के दौरान उसकी सेल पिछले 8 दशकों में सबसे ज्यादा रही। ये पांच रुपए का पारले जी लोगों की भूख मिटाने के लिए काफी मददगार साबित हुआ। सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने वाले प्रवासियों की भूख मिटाने के लिए पारलेजी पेट का सहारा बन कर सामने आया।

लॉकडाउन में खूब हुआ बिक्री

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक मार्च, अप्रैल और मई में पारले-जी का सबसे अच्छा कारोबार रहा। यानी लॉकडाउन के दौरान लोगों ने पारलेजी को खूब पंसद किया है। पारले-जी बिस्किट की इतनी अधिक बिक्री हुई है कि पिछले 82 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हालांकि, पारले कंपनी ने बिक्री के आंकड़े नहीं बताए हैं। पारले-जी 1938 से ही लोगों के बीच खास छाप छोड़ी है। कीमत 5 रुपए होने की वजह से लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर घरों में इसकी खरीदारी हुई। बड़े शहरों की बात करें या गांव की पारले जी लोगों की बीच शानदार कारोबार करती रही। पारले-जी विश्व में सर्वाधिक बिक्री वाला बिस्किट है।

मार्केट शेयर 5 फीसदी बढ़ा

रिपोर्ट के मुताबिक पारले प्रोडक्ट्स के कैटेगरी हेड मयंक शाह ने कहा कि कंपनी का कुल मार्केट शेयर करीब 5 फीसदी बढ़ा है और इसमें से 80-90 फीसदी ग्रोथ पारले-जी की सेल से हुई है। अच्छे प्रोडक्ट्स व कम पैसे में बिकने वाले पारले जी की ग्राहकों में खूब डिमांड में रही।

2016 में बंद हो गई थी फैक्ट्री

गौरतलब है कि भारत के सबसे चर्चित बिस्किट की यह फैक्ट्री 87 साल तक काम करने के बाद 30 जुलाई 2016 बंद हो गई थी। पारले प्रॉडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से इस फैक्ट्री की स्थापना 1929 में हुई थी और 1939 में बिस्किट का उत्पादन शुरू किया था। तब से ही यह मुंबई समेत पूरे देश में ग्लूकोज युक्त एनर्जी बूस्टर बिस्किट तैयार करने के लिए जानी जाती थी।


बाकी बिस्किट की भी हुई बिक्री

इसके साथ ही पिछले तीन महीनों में लॉकडाउन के दौरान बाकी कंपनियों के बिस्किट की भी खूब बिक्री हुई। विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिटानिया का गुड डे, टाइगर, मिल्क बिकिस, बार्बर्न और मैरी बिस्कुट के अलावा पारले का क्रैकजैक, मोनैको, हाइड एंड सीक भी खूब बिके।

Ruchi Sharma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned