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इस देश के मजदूरों ने पत्थरों को दिया था ताजमहल का रूप, अगर ये नहीं होते तो आप नहीं बोल पाते वाह ताज

ताजमहल का निर्माण शाहजहां ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज़ महल के लिए करवाया था।

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Arijita Sen

Feb 26, 2018

Taj mahal

नई दिल्ली।ताजमहल एक ऐसा नाम जिसका जिक्र आते ही एक बेहद ही खूबसूरत कृति हमारे आंखों के सामने आ जाती है। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इसकी खूबसूरती के कायल है और दूर-दूर से इसे जिंदगी में एकबार देखने तो ज़रूर आते हैं और इसे देखकर मुंह से पहला एक ही शब्द निकलता है और वो है वाह ताज। ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है। हम जानते ही है कि ताजमहल का निर्माण शाहजहां ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज़ महल के लिए करवाया था।

बता दें कि ताजमहल का निर्माण शाहजहां ने 1653 में अपनी बेगम मुमताज महल के लिए करवाया था। ताजमहल के अंदर मुमताज का मकबरा बनाया गया था। लेकिन क्या आपको पता है कि जिस कृति को देखने के लिए लोग इतने उतावले रहते हैं उसे बनाया किसने है? कहां से थे वो मज़दूर जिन्होंने कला के इस अद्भूत मिसाल को बनाया।

तो बता दें कि ताजमहल के निर्माण के लिए बगदाद से एक कारीगर को बुलाया गया था जो कि पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को आसानी से तराश सकता था। एक कारीगर को बुखारा से बुलाया गया था जो कि संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में सक्षम था।

ताजमहल में स्थित बड़े गुम्बदों क ो बनाने के लिए तुर्की के इस्तानबुल से कारीगरों को बुलाया गया था। ताजमहल को बनाने के लिए करीब 25 हज़ार श्रमिकों ने अपना योगदान दिया था। ताजमहल में अंदर जाने पर हमें मुमताज की कब्र देखने को मिलती है और कब्र के ऊपर उनकी खूबसूरती का बखान किया गया है।

कला के इस अद्भूत कृति को बनाने के लिए जगह-जगह से कुशल कारीगरों को बुलाया गया और जो जिस काम में माहिर है उसे वहीं काम सौंपा गया।ताजमहल का जिक्र आते ही हमारे दिमाग में शाहजहां और मुमताज का नाम आता है लेकिन असली प्रतिभा और मेहनत तो इन कारीगरों की थी जिन्होंने अपने मेहनत और कुशलता के दम पर एक मिसाल को जन्म दिया। जानकारी के लिए बता दें कि यूनेस्को ने ताजमहल को विश्व धरोहर घोषित कर चुका है।

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