
27 युवाओं ने 14 घंटे में तय किया सोरों से मुरैना तक 300 किमी का सफर
मुरैना. पैदल की जाने वाली विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा (कांवड़ यात्रा) अब अपनी पहचान डाक कांवड़ (दौड़ कांवड़) के रूप में बना रही है। साल दर साल खासतौर से युवाओं में डाक कांवड़ का क्रेेज बढ़ रहा है। इसके पीछे युवाओं का मानना है कि भक्ति के साथ-साथ सेहत भी इससे दुरुस्त रहती है। अंबाह विकासखंड के तरेनी गांव के 27 युवाओं ने सोरों घाट से पवित्र गंगाजल लाकर 300 किमी की दूरी दौडक़र 14 घंटे में पूरी करके डाक कांवड़ से तरेनी में स्थित वनखंडेश्वर महादेव पर जलाभिषेक किया। युवाओं ने जानकारी देते हुए बताया कि डाक कांवड़ लाने के लिए करीब एक माह पहले दौडऩे का अभ्यास शुरू कर देते हैं। डाक कांवड़ लेकर आ रहे ग्रुप के युवा राहुल तोमर ने बताया कि डाक कांवड़ से समय की खासी बचत होती है। शारीरिक फिटनेस भी ठीक रहती है। राहुल के अनुसार दल में 27 युवा थे। जो सौरों घाट से गंगाजल लेने के बाद बारी-बारी से दौड़ लगाकर मंजिल की ओर रवाना होते हैं। एक शिवभक्त के हिस्से में करीब 12 किलोमीटर की दौड़ आती है। दौड़ते समय जल को एक साथी दूसरे को सौंपता है। इस दौरान ध्यान रखा जाता है कि वह खंडित न हो। अंबाह से सोरों की दूरी करीब 300 किमी हैं। यह दूरी को ग्रुप टुकड़ों में बांट लेता है। एक के बाद एक साथी दौड़ लगाता है। उनके साथ चल रहे वाहन में जलपान की व्यवस्था होती है।
ये 27 युवा रहे मौजूद
डाक कांवड़ लाने वाले युवाओं में राकेश तोमर, हरेंद्र, श्री कृष्ण, मोनू, समुद्र, राधाकृष्ण, घुरवीर, जीतू, भूपेंद्र, पटेल, दीपू, राहुल, अनिल, गिर्राज, शेखर, सुमेर, राजन, नितिश, अतुल, अर्जुन, अज्जू, अनिल, अमन, अंशुल, भूरा, विष्णु, सचिन तोमर मौजूद रहे।
क्या होती है डाक कांवड़
कांवडि़ए अक्सर कांवड़ को लेकर लंबी यात्राएं करते हैं और बीच-बीच में विश्राम भी करते हैं। लेकिन डाक कांवड़ में ऐसा नहीं किया जाता है। असल में डाक कांवड़ में जब एक बार कांवड़ या बहंगी उठा लिया जाता है तो उसे लेकर उन्?हें लगातार चलते ही रहना होता है। कांवडय़िों को एक समय सीमा के अंदर ही निश्चित शिवालय में ही जलाभिषेक भी करना होता है। डाक कांवड़ यात्रा में आपको एक तय समय ने भगवान शिव का जलाभिषेक करना पड़ता हैं। यात्रा के समय मल मूत्र तक नहीं किया जाता हैं। डाक कांवड़ में नियमों की अवहेलना से यात्रा खंडित हो जाती हैं।
- हम पहली बार डाक कावंड़ लाए हैं। इस यात्रा में लगातार दौडऩा बहुत कठिन है, लेकिन हमारी आस्था हमारे जोश को कम नहीं होने देती। यह युवाओं के दमखम पर भी निर्भर करती है।
राकेश तोमर, कांवडिया, तरेनी
- डाक कांवड़ को तय समय में ही पूरा करना होता है और मंदिर में पहुंचकर जलाभिषेक करना होता है। उसी के हिसाब से तैयारी करनी पड़ती है।
राधाकृष्ण तोमर, कांवडिया, तरेनी
300 किमी की यात्रा 14 घंटे में पूरी की
डाक कांवड़ के लिए तरेनी गांव के 27 युवाओं की टीम मप्र के अंबाह विकासखंड के तरेनी गांव से उप्र के सोरों घाट के लिए गाजे-बाजे के साथ शिव भक्तों टीम रवाना हुई। युवाओं ने बिना रुके बिना थके 300 किमी की दूरी 14 घंटे में पूरी की। युवाओं ने बताया कि यह यात्रा बेहद ही रोमांचकारी होती हैं, एक साथी के थकने पर दूसरा साथी दौडक़र उसकी मदद करता हैं। युवाओं ने दोपहर में 03 बजे उप्र के सोरों घाट से पवित्र गंगाजल लेकर कावड़ उठाई जो सुबह 05 बजे तरेनी गांव पहुंच गई।
Published on:
21 Jul 2023 09:36 pm

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