जहां तक फैन की बात है, तो इसमें शाहरुख खुद पर भारी पड़े हैं। उनके सामने दोहरी चुनौती थी। एक कैरेक्टर ग्रे है, तो दूसरा हीरो वाला...। हीरो से कहीं ज्यादा वो अपने ग्रे कैरेक्टर यानी फैन के रूप में जमे हैं। फिल्म रिलीज होने से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छी नहीं जाएगी, लेकिन जिस तरह से फिल्म शुरू से लेकर आखिर तक बांधे रखती है, उसके आधार पर कह सकते हैं कि यह एक बेहतरीन मनोरंजक फिल्म है। फिल्म की पटकथा, निर्देशन और एडिटिंग इतनी जबरदस्त है कि फिल्म कहीं भी बोर नहीं करती। हर अगला सीन सवाल खड़ा करता है कि अब क्या होगा? इंटरवेल कब आ जाता है, पता ही नहीं चलता...।