126:48 मिनट की पूरी कहानी चाइना के संघाई से शुरू होती है, जहां भारतीय रॉ एजेंट के 20 में से तीन एजेंट को मार दिया जाता है। इनमें एक हरीश चतुर्वेदी भी मारा जाता है और वह मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर यशवर्धन (जॉन अब्राहम) का घनिष्ठ मित्र होता है। फिर एक दिन हरीश की ओर से भेजी की एक पुस्तक यशवर्धन को मिलती है, जिसमें उसके मरने का कारण कोडिंग व्यवस्था में होता है। इस को लेकर दिल्ली स्थित रॉ हेड क्वार्टर में बैठक होती है, जहां यशवर्धन उस पुस्तक को लेकर पहुंचता है। अब मुंबई पुलिस का इंस्पेक्टर यशवर्धन और रॉ एजेंट केके (सोनाक्षी सिन्हा) दोनों चाइना के लिए रवाना होते हैं कि आखिर रॉ की टीम में रहकर उनकी जानकारी दूसरों तक पहुंचा रहा है, जिसकी वजह से चाइना में आए दिन रॉ एजेंट मारे जा रहे हैं। वहां पहुंचते ही उन्हें शिव शर्मा (ताहिर राज भसीन) नाम के एजेंट पर शक होता है और उसे पकडऩे के लिए वे उसके घर जाते हैं, लेकिन वह वहां से भाग निकलता है। फिर जैसे-तैसे वह पकड़ में आता है, फिर उसे दिल्ली लाने के लिए एयरपोर्ट तक यशवर्धन और केके पहुंचने की कोशिश करते हैं, लेकिन शिव के आदमियों को उनकी हर एक मूवमेंट की खबर पहले से ही हो जाती थी। दरअसल, शिव ने केके की घड़ी में एक चिप लगा दी थी, जिसकी वजह से वह एक बार फिर भागने में सफल हो जाता है। इसी के साथ फिल्म दिलचस्प मोड़ लेते हुए आगे बढ़ती है।