190 की कहानी बिहार के राची से शुरू होती है, जहां 1981 में पान सिंह धोनी (अनुपम खेर) के यहां महेंद्र सिंह धोनी (सुशांत सिंह राजपूत) का जन्म होता है। फिर कुछ साल बाद फुटबॉल के मैदान पर गोलकीपर माही पर स्कूल के कोच (राजेश शर्मा) की नजर पड़ती है, तो वे माही को स्कूल टीम से क्रिकेट की विकेट कीपिंग के लिए तैयार कर लेते हैं। फिर माही जैसे-तैसे अपनी मां को मना लेता है और पान सिंह की दिली इच्छा के बगैर वह मैच पर पूरा कॉन्सेंट्रेटे करता है। टीम में छठे नंबर पर उतरने वाला बैट्समैन धोनी अब ओपनिंग बल्लेबाज बन जाता है। अब परीक्षा को लेकर पान सिंह टेंशन में होते हैं, लेकिन धोनी की मां और उसकी बहन गायत्री (भूमिका चावला) सब मिलकर पान सिंह को मना लेते हैं। अब धोनी अपने दोस्तों के सहयोग से तीन घंटे का पेपर ढाई घंटे में करके एक नामचीन क्रिकेट कॉलेज में शामिल होने के लिए जुट जाता है। अब यहां वो बिहार की तरफ से पंजाब टीम पर धमाकेदार प्रदर्शन तो करता है, पर उसका सलेक्शन इंडिया की तरफ से अंडर 19 में नहीं होता है। बावजूद इसके धोनी अपने दोस्तों को पार्टी देता है और खुद और ज्यादा मेहनत करने को ठानता है। फिर अचानक पता चलता है कि उसका सलेक्शन दिलीप ट्रॉफी में हो गया है, पर उसका लेटर जमशेदपुर में लटका होता है और कोलकाता में उसे रिपोर्टिंग करनी होती है। वह अपने दोस्तों की मदद से बिहार से कोलकता वाया रोड जाता तो है, पर वहां भी उसकी फ्लाइट मिस हो जाती है। अब उसे रेलवे स्पोर्ट कोटे से टिकट कलेक्टर की जॉब मिल जाती है। अब रेलवे के बड़े अधिकारी एके गांगुली की बदौलत उसे खडग़पुर में जॉब मिल जाती है। जॉब मिलते ही अपने बेहतर खेल के प्रदर्शन के कारण वह गांगुली का चाहेता बन जाता है और नौकरी पर कम, जबकि क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान देता है। इसलिए वह नौकरी में अनुपस्थित रहने लगा, जिसकी वजह से उसे रेलवे की तरफ से नोटिस मिलता है। अब वह नौकरी से परेशान होकर वहां से भाग जाता है और अपने घर पहुंचता है। जब उसके पापा को पता चलता है, तो वे भी नाराज होते हैं। इसी के साथ कहानी में ट्विस्ट आता है और फिल्म आगे बढ़ती है।