फिल्म 'निल बटे सन्नाटा' की कहानी बेहद साधारण है, लेकिन इसका विषय इसकी यूएसपी है। कह सकते हैं कि एक गरीब परिवार के सपनों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की चाह, उनके आपसी झगड़ों, स्कूल में बर्ताव और निजी जिंदगी की झलकियों को कैमरे में बहुत ही प्रभावी ढंग से पेश किया है। कहानी उत्तर प्रदेश के 'आगरा ' शहर की है, जहां एक कामवाली बाई चंदा सहाय (स्वरा भास्कर) अपनी बेटी अपेक्षा सहाय (रिया शुक्ला) के साथ रहती है। जब अपेक्षा दसवीं कक्षा में पहुंचती है, तो चंदा को उसकी फिक्र होने लगती है, क्योंकि अपेक्षा पढ़ाई में कमजोर है, खासकर गणित में काफी कमजोर है। फिर चंदा जिनके घर काम करती है, उनकी सलाह लेकर उसी स्कूल में दाखिला लेती है, जहां अपेक्षा पढ़ती है। फिर एक ही क्लास में पढ़ते हुए मां और बेटी के बीच कॉम्पिटीशन शुरू हो जाता है, जिसका अंजाम काफी दिलचस्प होता है। जी हां, आप समझ ही गए होंगे कि बेटी के सामने मां एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़ी होती है... और बेटी इस कॉम्पिटीशन को स्वीकार करती है... आगे बेहद ही दिलचस्प ढंग से दर्शाया गया है। बता दें कि 1 घंटा 40 मिनट की यह फिल्म कहीं भी बोर नहीं करती। शुरू से लेकर आखिर तक बांध के रखती है।