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‘OMERTA’ Movie Review: राजकुमार राव की बेहतरीन एक्टिंग से सराबोर है फिल्म!

फिल्म की कहानी पूरी तरह से जुर्म की दुनिया के इर्द गिर्द ही घुमती है। मूवी में कुल तीन घटनाओं के बारे में बताया गया है।

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Amit Kumar Singh

May 04, 2018

omerta

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स्टार कास्ट:राजकुमार राव

डायरेक्टर: हंसल मेहता
लेखक: मुकुल देव और हंसल मेहता
रेटिंग: तीन स्टार (***)

फिल्म 'शाहिद' और 'अलीगढ़' जैसी फिल्मों के निर्देशक हंसल मेहता एक बार फिर कुछ अलग तरह की फिल्म के साथ वापस आ गए हैं। फिल्म का नाम है 'ओमेर्टा'। मूवी के साथ सबसे बड़ा सस्पेंस यह उपजता है कि आखिर 'ओमेर्टा' का मतलब क्या है। चलिए हम आपको सबसे पहले वही बता देते हैं। इस इटैलियन शब्द 'ओमेर्टा' का मतलब है 'खामोशी'। यह कोई आम बोलचाल का शब्द नहीं है। दरअसल यह एक कोड वर्ड है। जिसे अक्सर क्राइम की दुनिया के लोग इस्तेमाल करते हैं। इस शब्द का प्रयोग आमतौर पर अपराधियों द्वारा अपने अपराध से जुड़ी जानकारी किसी से सीक्रेट बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यानी की जो इंसान किसी भी हालात में अपने राज दूसरे के सामने ना उगले। फिल्म की कहानी पूरी तरह से जुर्म की दुनिया के इर्द गिर्द ही घुमती है। मूवी में कुल तीन घटनाओं के बारे में बताया गया है।

पहली घटना, 1993 मुंबई बम धमाकों की है।

दूसरी घटना 1992 भारत-नेपाल प्लेन हाईजैक की है

तीसरी घटना 9/11 के आतंकी हमले की है जो अमेरिका के वर्ल्डट्रेड सेंटर पर किया गया था।

कहने को तो तीनों ही घटनाओं में कई साल का अंतर है। लेकिन सभी घटनाओं में एक कनेक्शन है और वो कनेक्शन है उमर सईद शेख।

कहानी
'ओमेर्टा' कहानी है एक ऐसी आदमी की जो असल जिंदगी में भी अपने विरोधाभासों के साथ जिंदा है। बेहद क्रूर आतंकवादी के किरदार में राजकुमार ने किरदार में जान डाल दी है।दरअसल मूवी की कहानी एक ब्रिटेन नागरिक उमर सईद शेख पर आधारित है जो लंदन में रहता है। उमर 90 के दशक के दौरान बोस्निया और फिलिस्तीन में मारे जा रहे मुस्लमानों के लिए इंसाफ चाहता है। उमर की जड़ें पाकिस्तान से जुड़ी हुई हैं, वहीं अचानक उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा होता है जो उसके नजरिए को ही बदल देता है।अपने इन्हीं इमोशन्स को वो लंदन के एक मौलाना को बताता और फिर वहीं से शुरू होता है जिहाद का सफर।

इस दौरान वो पाकिस्तान से होते हुए भारत में दाखिल होता है।उमर जिसने अपने इस जिहाद की शुरुआत तो बोस्निया में मुसलमानों के साथ हो रही नाइंसाफी के लिए की थी लेकिन बाद में वो भी कश्मीर राग में उलझकर रह गया। अपनी इस जिहाद की लड़ाई के पहले पड़ाव में वो दिल्ली पहुंचता है। यहां वो लोगों से कहता है कि वो लंदन का रहने वाला है और यहां वो अपने मां-बाप से मिलने के लिए आया है। इसी दौरान वह भारत के चार टूरिस्टों को किडनैप कर लेता है। हालांकि पुलिस की समझदारी और तेजी के चलते उन चारों टूरिस्टों को बचा लिया जाता है। इसके बाद वो जेल में जाता है और फिर बाहर आता है। जेल से बाहर आते ही वो 1993 में हुए बम धमाकों के दौरान भारत सरकार को और पाकिस्तान सरकार को दो झूठे फोन करता है। जिसके चलते दोनों ही देशों की सीमाओं पर युद्ध जैसी स्थिति बन जाती है। इसके बाद पुलिस की कार्यवाही में उमर सहित दो अन्य आतंकवादियों को 93 के बम धमाकों की साजिश के आरोप में जेल में बंद कर दिया जाता है।इसके बाद पाकिस्तान के आतंकवादी भारतीय प्लेन हाईजैक कर तीन आतंकवादियों की रिहाई मांगते हैं। इन तीन आतंकवादियों में उमर के साथ हाफिज सईद भी शामिल था।

1999 में भारत-नेपाल की फ्लाइट को हाइजैक किया गया था जिसके यात्रियों की सुरक्षा के बदले उमर सहिद सहित दो आतंकवादियों को भारत सरकार द्वारा रिहा किया गया और उसके बाद होता है World Trade Centre पर आतंकी हमला।यह हमला अमरीका को झकझोर कर रख देता है। साथ ही पूरी दुनिया को सकते में डाल देता है। हालांकि फिल्म में उमर का इस हमले में सीधे तौर पर कोई इन्वॉलवमेंट नहीं दिखाया गया है। लेकिन अमरीका के एक पत्रकार डेनियल पर्ल ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग के जरिए इस हमले में उमर का कनेक्शन बताया था।साथ ही इसके तार कश्मीर में बैठे अलगाववादी नेता गिलानी तक जोड़ लिए थे। डेनियल की मुलाकात उमर से होती है और उमर उसको विश्वास दिलाता है कि वो उसे गिलानी से मिलवाएगा। इसी दौरान उमर डेनियल को अगवा कर उसकी हत्या कर देता है। बाद में इसी हत्या के आरोप में उसे जेल होती है।

एक्टिंग
एक बार फिर राजकुमार राव ने अपने एक्टिंग की काबिलियत को लोहा मनवाया है। वैसे तो फिल्म में मुख्य भूमिका में राजकुमार राव ही हैं,लेकिन अलग-अलग मौकों पर कई कलाकार नजर आते हैं । सभी एक्ट्रस ने अपने-अपने किरदारों को बखूबी निभाया है। फिल्म के दौरान कई ऐसे मौके भी आते हैं जब आपको ऐसा प्रतीत होने लगता है कि ये राजकुमार नहीं बल्कि उमर शेख ही है।

निर्देशन
बता दें कि हंसल मेहता ने पूरी तरह से उमर की कहानी को पर्दे पर उतारकर रख दिया है। हंसल मेहता ने फिल्म में कई जगह उस दौर की घटनाओं के असली फुटेज का इस्तेमाल किया है। जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर हाफिज सईद और उमर की रिहाई के फुटेज शामिल है।इस वजह से इस मूवी को आतंकवादी उमर के जीवन पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री भी कहा जा सकता है। हंसल मेहता ने कहीं भी फिल्म को मनोरंजक बनाने के नाम पर कहानी में मनघड़ंत पेंच नहीं जोड़े हैं। उन्होंने फिल्म में फिल्मायें सभी घटनाओं के लिए बेहद रिसर्च किया है।

कहानी : 3/5
स्क्रिनप्ल : 3.5/5
डायरेक्शन : 3.5/5
संगीत : 3/5