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Movie Review: सिर्फ नवाजुद्दीन के फैंस के लिए है रमन राघव 2.0

जहां तक अभिनय की बात है तो नवाजुद्दीन कभी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ते। साइको किलर रमन के रूप में रमन का किरदार खौफ पैदा करता है....

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Pawan Kumar Rana

Jun 24, 2016

Raman Raghav 2.0

Raman Raghav 2.0

कलाकार: नवाजुद्दीन सिद्दीकी, विकी कौशल, विपिन शर्मा, सोभिता धुलिपाला, अमृता सुभाष
निर्देशक: अनुराग कश्यप
अवधि: 2.20 मिनट


मुंबई। रमन राघव 2.0 बॉलीवुड के दो ऐसे लोगों के साथ मिलकर पेश की गई मूवी है जो लीक से हटकर काम करना पसंद करते हैं। ये हैं इस मूवी के लीड एक्टर नवाजुद्दीन और निर्देशक अनुराग कश्यप। नवाजुद्दीन की खास बात ये है कि वे किरदार को इतनी बारीकी से पढ़ते हैं कि हर बार उनका अभिनय अलग तरह के रंग बिखेरता नजर आता है।


रमन राघव 2.0 की कहानी

मूवी की कहानी साइको किलर रमन (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) के ही किरदार पर फोकस है। रमन का साइको माइंड उससे आए दिन हत्याएं करवाता है। इनमें उसके घर वाले तो कभी मास्टर तो कभी ब्याज पर पैसे देने वालों की हत्याएं शामिल हैं। रमन एक दिन खुद पुलिस के पास जाकर 7 मर्डर करने की बात कहता है लेकिन पुलिस इस तरह की हरकत को बेवकूफाना करार दे उसे गंभीरता से नहीं लेती है। लेकिन जब रमन एक दिन अपनी बहन, उसके पति और अपने भांजे को भी मौत के घाट उतार देता है पुलिस रमन के पीछे लग जाती है। इस तरह कत्लों की कड़ी से कड़ी मिलाने का जिम्मा इंस्पेक्टर राघव (विकी कौशल) को सौंपा जाता है। हमेशा नशे में धुत रहने वाले रमन की जिंदगी में सिम्मी (सोभिता धुलिपाला) की मौजूदगी भी रहती है। पुलिस रमन के खिलाफ सबूत जुटा कर उसे सलाखों के पीछे कर पाती है या नहीं, इसके लिए आपको मूवी देखनी होगी।


अभिनय

जहां तक अभिनय की बात है तो नवाजुद्दीन कभी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ते। साइको किलर रमन के रूप में रमन का किरदार खौफ पैदा करता है। तेज आवाज के बैकग्राउण्ड म्यूजिक में भी नवाजुद्दीन के कम आवाज में बोले गए डॉयलॉग्स अपना असर दिलोदिमाग तक छोड़ते हैं। इंस्पेक्टर के रूप में विकी कौशल अपने किरदार में जान डालने की पूरी कोशिश करते नजर आते हैं। पर जब सामने नवाजुद्दीन हो तो उसके लिए एक्टिंग का कीड़ा होने की जरूरत है। मूवी के बाकी किरदार भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में रमन का सपोर्ट करते नजर आते हैं।




निर्देशन, फिल्मांकन, म्युजिक


अनुराग कश्यप ने एक और बेहतरीन फिल्म पेश की है। हालांकि फिल्म को और कसने की जरूरत महसूस होती है। 60 के दशक के दृश्य बनाने में क्रू ने पूरी मेहनत की है और ये सेट्स में नजर भी आती है। इस मूवी में म्युजिक नहीं भी होता तो चलता। कहीं-कहीं बैकग्राउण्ड म्यूजिक कुछ ज्यादा ही कानफाडू है तो कहीं सन्नाटा। शायद यह फिल्म की गति को बढऩे से रोकता नजर आता है।

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