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MOVIE REVIEW: बाबूमोशाय बंदूकबाज नहीं लगा पाए सही निशाना, पर फिल्म में नवाज की एक्टिंग को मिले पूरे नंबर

MOVIE REVIEW: बाबूमोशाय बंदूकबाज नहीं लगा पाए सही निशाना, पर फिल्म में नवाज की एक्टिंग को मिले पूरे नंबर

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मुंबई

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Riya Jain

Aug 25, 2017

Babumsohai Bandookbaaz

Babumsohai Bandookbaaz

कलाकार- नवाजुद्दीन सिद्दीकी, बिदिता बाग,श्रद्धा दास, जतिन गोस्वामी, दिव्या दत्ता और अनिल जॉर्ज
निर्देशक- कुशन नंदी
मूवी टाइप-एक्शन, रोमांटिक
मूवी टाइम-2 घंटा 2 मिनट

फिल्म बाबूमोशाय बंदूकबाज की काफी दिनों से चर्चा चल रही थी। आखिरकार फिल्म बड़े पर्दे पर आ ही गई। लेकिन नवाजुद्दीन सिद्दिकी के फेन्स के लिए बुरी खबर है की फिल्म की कहानी इतनी पॅावरफुल नहीं निकली जितना सोचा गया था। फिल्म का स्क्रीन प्ले भी ठीकठाक ही रहा। पर हां फिल्म में नवाज की एक्टिंग एक बार फिर लोगों का दिल जीतने में कामयाब रहेगी।

Enough said! 😎 #BabumsohaiBandookbaaz releasing on 25th August! @babumoshaibandookbaaz

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बाबूमोशाय बंदूकबाज की पूरी कहानी
फिल्म बाबूमोशाय बंदूकबाज एक बदले पर आधारित कहानी है। फिल्म में नवाज एक कॉन्ट्रैक्ट किलर्स बाबू बिहारी का किरदार निभा रहे हैं जिसका मकसद पैसों के लिए ज्यादा से ज्यादा खून करना है। काम के दौरान ही बाबू की मुलाकात फिल्म की हिरोइन बिदिता यानी फुलवा से होती है। दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है। साथ ही एक दिन ठेके पर बैठे बाबू को बहुत सालों बाद अपना बचपन का दोस्त जतिन मिलता है। पेशे से जतिन भी एक कॅान्ट्रेक्ट किलर ही होता है लेकिन जतिन बाबू को अपना गुरु मानता है।

दोनों में दोस्ती और गहरी हो जाती है। पर एक दिन जतिन और बाबू के हाथ एक बहुत बड़ा कॅान्ट्रेक्ट लगता है जिसमें उन्हें तीन लोगों का खून करना होता है। जो पहले उन तीन लोगों को मारेगा सारा पैसा उसका। बाबू ये शर्त जीतने ही वाला होता है की जतिन पैसे के लालच में बाबू को ही मार देता है।

सबको लगता है बाबू मर गया पर कहानी में ट्विस्ट आता है और 8 साल बाद बाबू वापस लौटता है। पर इस बार वो एक दोस्त की तरह नहीं बल्कि दर्द में सुलघते एक दुश्मन की तरह एन्ट्री लेता है। बाबू की गर्लफ्रेंड फुलवा को भी जतिन मार देता है। धीरे धीरे बाबू को पता लगाता है की इन सब के पीछे आखिर कौन था? और अंत में उसे पता कुछ एसा पता चलता है जो उसके लिए काफी घातक साबित होता है।

फिल्म की कहानी पुराने जमाने वाले धोखे प्यार बदला जैसी भावनाओं पर आधारित है जिसे मॅार्डन तकीके से दिखाने की कोशिश की गई है लेकिन निर्देशक उसमें सफल नहीं हो पाए हैं। फिल्म में बाबू और फुलवा का रोमांस भर भरकर डाला गया है। फिल्म को गैंग्स ऑफ वासेपुर की तरह बनाने की कोशिश तो अच्छी की गई थी लेकिन अफसोस कुशन नंदी उसमें असफल रहे।

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