
किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 73
असद खान, 07 वर्ष
एक जंगल में एक बंदर पेड़ पर रहता था। एक दिन एक तेंदुआ उसे पकड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ने लगा। बंदर ने खतरा समझ लिया, लेकिन वह घबराया नहीं और तुरंत बोला, "रुको! नीचे शिकारी आ रहा है।" यह सुनकर तेंदुआ डर गया और जल्दी से नीचे कूदकर भाग गया। बंदर सुरक्षित बच गया और खुशी-खुशी पेड़ पर बैठा रहा। इस घटना से तेंदुए को समझ आया कि सिर्फ ताकत ही काफी नहीं होती, बल्कि समझदारी भी जरूरी होती है।
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पलकांश भट्ट, 12 वर्ष
जंगल के बीच एक पुराना पेड़ था, जिसकी मोटी शाखा पर एक तेंदुआ आराम कर रहा था। पास ही उसी शाखा पर एक छोटा बंदर बैठा था, जो एक फल खा रहा था। बंदर थोड़ा घबराया हुआ था, क्योंकि तेंदुआ बहुत खतरनाक जानवर माना जाता है। तेंदुए ने धीरे-धीरे बंदर को देखा, लेकिन उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था। बंदर ने हिम्मत करके कहा, "तुम मुझे खाओगे तो नहीं?" तेंदुआ मुस्कुराया और बोला, "नहीं, आज मैं सिर्फ आराम करना चाहता हूं।" बंदर को थोड़ा भरोसा हुआ। उसने अपने फल का एक टुकड़ा तेंदुए की ओर बढ़ाया। तेंदुए ने उसे खा लिया और कहा, "तुम बहुत अच्छे हो। डर के बजाय दोस्ती करना ज्यादा अच्छा होता है।" धीरे-धीरे दोनों बातें करने लगे और गहरे दोस्त बन गए।
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दानियाल अली, 08 वर्ष
एक घने जंगल में एक पेड़ की ऊंची डाल पर एक बंदर बैठा था। वह आराम से फल खा रहा था कि तभी उसने देखा कि दूसरी डाल पर एक चालाक तेंदुआ लेटा हुआ है। बंदर उसे देखकर घबरा गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। जैसे ही तेंदुआ बंदर की तरफ बढ़ने लगा, बंदर ने तुरंत एक योजना बनाई। वह जोर-जौर से हंसने लगा और बोला, "अरे तेंदुआ भाई! तुम्हें पता है, नीचे जंगल में शिकारियों का एक दल आ रहा है। वे तुम्हें पकड़ने वाले हैं।" यह सुनकर तेंदुआ डर गया और नीचे झांकने लगा। इसी मौके का फायदा उठाकर बंदर फुर्ती से दूसरी डाल पर कूद गया और भाग गया।
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मिथुन, 10 वर्ष
एक घने जंगल में एक पेड़ की डाल पर एक बंदर बैठा था और दूसरी डाल पर एक थका हुआ तेंदुआ लेटा था। बंदर ने सोचा कि कहीं तेंदुआ उसे नुकसान न पहुंचा दे। वह समझदारी से बोला, "मित्र, तुम बहुत थके हुए लग रहे हो। यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हें मीठे फल ला सकता हूं।" तेंदुए ने बंदर की दयालुता देखी और उसका मन पिघल गया। उसने वादा किया कि वह बंदर को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। बंदर तुरंत फल तोड़कर लाया। फल खाकर तेंदुए की भूख शांत हो गई। उस दिन के बाद दोनों अच्छे मित्र बन गए और जंगल के दूसरे जानवर उनकी दोस्ती की मिसाल देने लगे।
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व्योम पंड्या, 07 वर्ष
एक घने जंगल में बंदर और तेंदुआ अच्छे दोस्त थे। एक दिन जब तेंदुआ पेड़ पर आराम कर रहा था, तभी कुछ शिकारी वहां आ गए। बंदर ने उन्हें देख लिया और तुरंत तेंदुए को सावधान किया। तेंदुआ थका हुआ था और भाग नहीं पा रहा था। बंदर ने समझदारी दिखाई और पेड़ों पर कूद-कूदकर शोर मचाने लगा। शिकारी बंदर के पीछे भागने लगे और तेंदुआ सुरक्षित बच गया। बाद में तेंदुए ने बंदर को धन्यवाद दिया।
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हर्षराज सिंह चौहान, 11 वर्ष
एक विशाल जंगल में एक ताकतवर शेर और एक शरारती बंदर रहते थे। एक दिन शेर पेड़ के नीचे सो रहा था, तभी बंदर ने पास जाकर धीरे से शेर से पूछा, "महाराज, क्या हम मित्र बन सकते हैं?" शेर पहले तो हैरान हुआ, क्योंकि किसी ने ऐसी हिम्मत नहीं की थी, लेकिन अकेलेपन के कारण उसने दोस्ती स्वीकार कर ली। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि बंदर शेर के बालों की गंदगी साफ करने लगा। जंगल के बाकी जानवर यह देखकर दंग रह जाते थे।
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तपस्या एच. जैन, 11 वर्ष
एक घने जंगल में बंटी नाम का बंदर और शेरू नाम का तेंदुआ रहता था। एक दिन शेरू ने बंटी का शिकार करने की सोची। बंटी ने उसे अपनी ओर आते देखा और तुरंत एक योजना बनाई। उसने शेरू से कहा, "शेरू भाई, पेड़ के पीछे बहुत मीठे फल हैं, उन्हें खाकर तुम्हारी भूख मिट जाएगी।" शेरू ने विश्वास कर लिया और जैसे ही वह पीछे मुड़ा, बंटी फुर्ती से दूसरी शाखा पर छलांग लगाकर दूर निकल गया। शेरू को अपनी मूर्खता का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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नित्या राजपूत, 08 वर्ष
एक घने जंगल में चीकू नाम का बंदर और एक क्रोधी तेंदुआ एक ही पेड़ पर रहते थे। बंदर बहुत नटखट था और अक्सर तेंदुए को परेशान करता था। एक दिन तेंदुए ने गुस्सा होकर बंदर पर हमला कर दिया। घायल बंदर ने औषधीय पत्तियों से अपना इलाज किया और ठीक होने पर तेंदुए को सबक सिखाने की सोची। उसने मधुमक्खी का एक छत्ता तेंदुए के पास फेंक दिया। मधुमक्खियों के काटने से तेंदुआ वहां से भाग गया और फिर कभी बंदर को परेशान नहीं किया।………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………
रुचिका लुंकड़, 08 वर्ष
एक घने जंगल में एक तेंदुआ और एक लंगूर रहते थे। तेंदुआ अपने बल पर घमंड करता था और लंगूर को कमजोर समझता था। एक दिन तेंदुआ पेड़ से फिसलने लगा। लंगूर ने बिना देर किए अपनी फुर्ती दिखाई और तेंदुए का हाथ पकड़कर उसे ऊपर खींच लिया। तेंदुए को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने माफी मांगी। लंगूर ने सिखाया कि असली ताकत शरीर में नहीं, बुद्धि में होती है।
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हेतार्थ राजगुरु, 08 वर्ष
एक पेड़ पर एक बंदर और उसका दोस्त बाघ बैठे थे। दोनों ने साथ मिलकर बहुत मीठे आम खाए। आम इतने स्वादिष्ट थे कि बाघ ने शिकार करना ही छोड़ दिया। अप्रैल के महीने में अचानक बर्फ पड़ने लगी, जिसे देखकर दोनों हैरान रह गए। उन्होंने ठंड और सुहावने मौसम का एक साथ आनंद लिया और अपनी अनोखी दोस्ती के साथ सो गए।
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जैनील मेवाड़ा, 07 वर्ष
एक घमंडी तेंदुआ बंदर को पकड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ने लगा। बंदर ने कहा, "तेंदुआ भाई, अगर तुम सच में ताकतवर हो तो सामने वाले पेड़ पर कूदकर दिखाओ।" घमंड में आकर तेंदुए ने लंबी छलांग लगाई, लेकिन वह संतुलन खोकर नीचे गिर गया। बंदर ने हंसते हुए कहा कि ताकत से ज्यादा समझदारी जरूरी है। इसके बाद तेंदुए का घमंड टूट गया और उसने दुश्मनी छोड़ दी।
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रियानसी मीना, 08 वर्ष
एक पेड़ के नीचे एक घमंडी तेंदुआ रहता था। एक दिन वह ऊंचे पेड़ पर फंस गया। उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया क्योंकि सब उसके घमंड से परेशान थे। अंत में दयालु बंदर ने एक लंबी बेल नीचे फेंककर उसकी मदद की। तेंदुए ने अपनी गलती मानी और जानवरों से माफी मांगी।
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लक्षिता चौधरी, 11 वर्ष
एक भूखा चीता शिकार की तलाश में था। उसने देखा कि दो बंदर केले के लिए लड़ रहे हैं। उसने उन्हें लालच दिया और कहा, "अगर यह गुच्छा चाहिए तो पेड़ के ऊपर आ जाओ।" एक बंदर डरकर भाग गया, लेकिन दूसरा लालच में चीते के पास चला गया और अपनी जान गंवा बैठा।
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तुषाल हरितवाल, 13 वर्ष
एक भूखा तेंदुआ बंदर को बेवकूफ बनाकर खाना चाहता था। वह बंदर के पास जाकर सोने का नाटक करने लगा। बंदर उसकी चाल समझ गया और उसने एक फल नीचे फेंका। तेंदुए को लगा कि कोई शिकार भाग रहा है और वह तुरंत पेड़ से कूद गया। बंदर ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम तो थक गए थे न?"
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समायरा गणवीर, 07 वर्ष
एक बंदर ने हिम्मत दिखाकर तेंदुए से दोस्ती का प्रस्ताव रखा। तेंदुआ हैरान हुआ पर मान गया। दोनों साथ रहने लगे; बंदर फल खिलाता और तेंदुआ कहानियां सुनाता। एक दिन तेज बारिश में दोनों ने एक-दूसरे का साथ दिया। उनकी दोस्ती ने साबित कर दिया कि साथ रहने से डर खत्म हो जाता है।
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नीरज टेलर, 09 वर्ष
एक घमंडी शेर और एक छोटा बंदर दोस्त थे। एक दिन बारिश में शेर बीमार पड़ गया और ठंड से कांपने लगा। छोटे बंदर ने बड़े पत्तों से शेर के लिए छत बनाई और उसे फल खिलाए। शेर को समझ आया कि ताकत सिर्फ शरीर की नहीं, दिल की भी होती है।
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चेतन चाण्डा, 07 वर्ष
एक भूखा चीता शिकार न मिल पाने के कारण बहुत कमजोर हो गया था। बंदर को उस पर दया आई और वह उसके लिए फल लेकर आया। फल खाकर चीते की ताकत वापस आ गई। चीते ने बंदर का धन्यवाद किया और वादा किया कि वह उसे कभी नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
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नव्या वर्मा, 11 वर्ष
एक तेंदुए और बंदर की दोस्ती देखकर सब हैरान थे। तेंदुए ने कहा कि मित्रता दिल से होती है, ताकत से नहीं। एक दिन तूफान में बंदर पेड़ से गिरने लगा, तब तेंदुए ने उसे बचा लिया। उन्होंने जंगल को सिखाया कि दोस्ती में स्वार्थ नहीं होता।
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हेमंत कुमावत, 13 वर्ष
तेंदुए ने बंदर को खाने के लिए दोस्ती का नाटक किया। बंदर उसकी चाल समझ गया और एक खेल का प्रस्ताव रखा। उसने कहा, "जो पहले नीचे जाकर ऊपर आएगा, वही जीतेगा।" तेंदुआ जैसे ही नीचे उतरा, बंदर ऊंची डाल पर जाकर छिप गया।
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कृष्णा माहेश्वरी, 11 वर्ष
एक भूखे तेंदुए ने बंदर पर हमला करना चाहा, लेकिन बंदर अपनी फुर्ती से दूसरी डाल पर कूद गया। भारी शरीर के कारण तेंदुआ वहां नहीं पहुंच सका। बंदर ने हंसते हुए कहा कि शिकार के लिए सिर्फ ताकत नहीं, हल्का शरीर भी चाहिए।
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सिद्धार्थ झोरड़, 08 वर्ष
एक बार चीते के पेट में बहुत दर्द हुआ। उसके दोस्त बंदर ने जंगल से जड़ी-बूटियां लाकर दवा बनाई। दवा पीकर चीता ठीक हो गया और दोनों बहुत खुश हुए।
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देवानंद सिंह परिहार, 07 वर्ष
एक तेंदुआ शिकार न मिलने पर उदास था। उसने एक बंदर को देखा और उस पर कूदा, लेकिन वह डाल पर लटक गया और गिरने वाला था। बंदर ने उसका पैर खींचकर उसे गिरने से बचा लिया। इस उपकार के बाद वे दोनों पक्के दोस्त बन गए।
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शांति विश्वकर्मा, 10 वर्ष
सर्कस से भागे एक चीते और बंदर ने जंगल में शरण ली। उन्होंने आपस में बात की कि कैसे सर्कस के मालिक अपनी कमाई के लिए उनकी आजादी छीन लेते हैं। अब वे जंगल में आजाद होकर खुश थे।
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नित्या माहेश्वरी, 11 वर्ष
भूखा तेंदुआ बंदर को खाना चाहता था। बंदर ने उसे आराम करने का लालच दिया। तेंदुआ जैसे ही लेटा, बंदर छलांग लगाकर दूर निकल गया। तेंदुए को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।
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कनुषी भट्ट, 12 वर्ष
एक तेंदुए को सजा मिलने वाली थी। बंदर ने एक सौदा किया—वह तेंदुए की पूंछ बचाएगा और बदले में तेंदुआ उसे शहर घुमाएगा। तेंदुए ने बंदर को शहर छोड़ा और खुद वहां छिपकर अपनी जान बचाई।
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सुवीर रत्नावत, 09 वर्ष
एक तेंदुए का पैर फिसल गया और वह गिरने लगा। बंदर ने डाल बढ़ाकर उसकी जान बचाई। बाद में जब शिकारी आए, तो तेंदुए ने अपनी ताकत से बंदर की रक्षा की। दोनों ने समझा कि दोस्ती में ताकत और समझदारी दोनों जरूरी हैं।
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शिव्या बिश्नोई, 08 वर्ष
एक नटखट बंदर ने सोते हुए तेंदुए को जगा दिया। तेंदुआ गुस्सा हुआ तो बंदर ने झूठ बोल दिया कि पीछे शिकारी है। जैसे ही तेंदुए ने पीछे देखा, बंदर नौ-दो ग्यारह हो गया।
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मोहम्मद नवाज, 10 वर्ष
जंगल में एक उदास चीता रहता था जिसका कोई दोस्त नहीं था। एक नए बंदर ने उस पर विश्वास किया और उससे दोस्ती की। चीते को अंतत: एक सच्चा साथी मिल गया और उसका अकेलापन दूर हो गया।
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उदय शर्मा, 12 वर्ष
तेंदुए ने बंदर को पकड़ लिया, लेकिन जब बंदर ने अपने परिवार के बारे में बताया, तो तेंदुए को उस पर तरस आ गया और उसे छोड़ दिया। इस दयालुता ने उन्हें हमेशा के लिए दोस्त बना दिया।
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आश्वी रोंगे, 07 वर्ष
चीते ने बंदर की खाल पहनकर भोलू बंदर को धोखा देना चाहा। पर भोलू ने उसकी पूंछ देख ली और समझ गया कि यह छलावा है। वह तुरंत वहां से भाग निकला और चीता हाथ मलता रह गया।
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त्वेषा शर्मा, 09 वर्ष
जब चीते ने बंदर का शिकार करना चाहा, तो बंदर ने बिना डरे उसे अपना दोस्त बनाने की इच्छा जताई। चीता प्रभावित हुआ और दोनों साथ मिलकर भोजन की तलाश करने लगे।
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सुवीर रत्नावत, 09 वर्ष
गोलू और उसकी बहन परी को स्टोर रूम में एक ग्लोब मिला। परी ने उसे बताया कि यह पूरी दुनिया का नक्शा है। ग्लोब के जरिए उन्होंने भारत, समुद्र और बर्फीले ध्रुवों के बारे में जाना। गोलू अब बड़ा होकर पायलट बनने और पूरी दुनिया घूमने का सपना देखता है।
Updated on:
16 Apr 2026 04:36 pm
Published on:
16 Apr 2026 04:35 pm
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